उत्तर भारत में भीषण गर्मी के चलते AC ब्लास्ट की कई खबरें सामने आई। सबसे ताज़ा मामला दिल्ली के हौज खास से आया है, जहां देर रात AC में धमाके के शक से लगी आग में धनेंद्र कुमार की मौत हो गई। वह एक रिटायर्ड IAS अधिकारी और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के पहले चेयरमैन थे।
पुलिस ने बताया कि गुरुवार रात करीब 11:18 बजे आग लगी। उस समय घर के अंदर परिवार के सदस्यों और घरेलू सहायकों समेत 5 लोग मौजूद थे। पुलिस की टीमें और दमकल विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन धनेंद्र कुमार की जान नहीं बचाई जा सकी। उनका बेटा घायल हो गया और उसका इलाज चल रहा है।
वहीं दूसरी घटना गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम में, 26 मई को एक ऊंची इमारत के अपार्टमेंट के अंदर कथित तौर पर एक स्प्लिट AC में धमाका हो गया, जिससे 15वीं मंज़िल पर भीषण आग लग गई। इसी महीने की शुरुआत में, दिल्ली के विवेक विहार में एक इमारत में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई थी। आग लगने की वजह AC में धमाका और शॉर्ट सर्किट होने का शक था। आईए जानेत है गर्मियों में AC में धमाके क्यों होते हैं?
– मई और जून के महीनों में ACका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होता है जिससे लोड बढ़ जाता है। लंबे समय तक लगातार चलना, कमज़ोर वायरिंग, गंदे फ़िल्टर और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव एक सामान्य कूलिंग मशीन को आग लगने के बड़े खतरे में बदल सकते हैं।
AC से आग लगने के खतरे के मुख्य कारण
गंदा फ़िल्टर हवा के बहाव को रोक सकता है। ऐसे में कंप्रेसर को ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है और वह बहुत ज़्यादा गर्म हो जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी बाइक को गलत गियर में डालकर घंटों तक किसी पहाड़ी पर चढ़ने के लिए मजबूर किया जाए। ऐसे में कोई न कोई पुर्जा खराब हो ही जाता है।
वोल्टेज में उतार-चढ़ाव भी एक आम वजह है। वोल्टेज में अचानक तेज़ी या कमी आने से कंप्रेसर और बिजली के पुर्जों को नुकसान पहुँच सकता है। पुराने तार, ढीले कनेक्शन और खराब इंसुलेशन (तारों पर चढ़ा सुरक्षा कवच) स्थिति को और भी बदतर बना देते हैं। रेफ्रिजरेंट गैस लीक होने से कूलिंग कम हो सकती है। ऐसे में AC लगातार ज़्यादा ज़ोर से चलता रहता है, और ज़्यादा गर्म हो जाता है, जिससे आग लगने का खतरा पैदा हो सकता है।
AC ब्लास्ट खतरे को कैसे कम कर सकते हैं?
-गर्मियों में AC का ज़्यादा इस्तेमाल शुरू करने से पहले उसकी सर्विसिंग ज़रूर करवाएं।
-फ़िल्टर को नियमित रूप से साफ़ करते रहें।
-सही वोल्टेज स्टेबलाइज़र या सर्ज प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करें।
-AC को बिना किसी ब्रेक के पूरे-पूरे दिन लगातार न चलाएं।
AC से आने वाली ‘हिसिंग’ (सांय-सांय जैसी) आवाज़ों, कूलिंग में कमी, कॉइल्स पर बर्फ़ जमने या वेंट्स (हवा निकलने वाली जगह) से गर्म हवा आने जैसे संकेतों पर नज़र रखें। घरों और अपार्टमेंट्स में काम करने वाले स्मोक डिटेक्टर, आग बुझाने वाले यंत्र, खुली सीढ़ियाँ और बिना ताले वाले टेरेस के दरवाज़े होने चाहिए।
