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नई दिल्ली, 10 फरवरी । आम आदमी पार्टी (आआपा) ने एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को अभी तक यूनिफार्म, स्टेशनरी और स्कूल बैग का पैसा नहीं मिलने पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मांग की कि सरकार गरीब परिवार से आने वाले इन बच्चों के खाते में यूनिफार्म का पैसा जल्द भेजे और पैसा रोकने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

एमसीडी में सह प्रभारी प्रवीण कुमार ने मंगलवार को आआपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार देश को विश्व गुरु बनाने और शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया भर में नाम रोशन करने की बातें करती है, लेकिन ये वादे धरातल पर बिल्कुल खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के एमसीडी स्कूलों में लगभग 2.30 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों की ड्रेस, कॉपी और किताबों के लिए सरकार उनके खातों में पैसे भेजती है, लेकिन निगम के शासन में अभी तक इन बच्चों के खातों में यह राशि क्रेडिट नहीं हुई है।

प्रवीण कुमार ने आंकड़ों का विवरण देते हुए बताया कि एमसीडी स्कूल के प्रत्येक बच्चे को हर साल 1670 रुपये दिए जाते हैं। इनमें से 1250 रुपये यूनिफॉर्म, 300 रुपये स्टेशनरी और 120 रुपये बैग के लिए दिए जाते हैं। फरवरी में परीक्षा के बाद सत्र खत्म हो जाएगा, लेकिन बच्चों का यूनिफार्म के लिए मिलने वाली 1670 रुपये की राशि का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। मार्च में परीक्षाएं हो जाएंगी और अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जाएगा। पूरा शैक्षणिक सत्र समाप्त होने को है, लेकिन अभी तक बच्चों के खातों में पैसे नहीं आए है। एमसीडी को कुल 109 करोड़ रुपये बच्चों के खाते में भेजने थे, लेकिन अभी 58 लाख रुपये ही बच्चों के खाते में पहुंचे हैं।

प्रवीण कुमार ने कहा कि एमसीडी के प्राथमिक स्कूलों में अत्यंत गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ने जाते हैं, जिनके माता-पिता रेहड़ी लगाते हैं या मजदूरी करते हैं। उनके लिए यह 1650 रुपये की यह राशि भी बहुत मायने रखती है। उन्होंने आम आदमी पार्टी की तरफ से मांग की कि बच्चों के खातों में तुरंत पैसा भेजा जाना चाहिए।

प्रवीण कुमार ने बताया कि दिल्ली सरकार ने डीबीटी के माध्यम से 109 करोड़ रुपये भेजे जाने थे, लेकिन आंकड़ों के अनुसार 58 करोड़ रुपये ही गए है और एमसीडी ने पैसा अपने पास ही रखा हुआ है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार जिस विश्व गुरु का सपना दिखाती है, उसमें स्कूल और दिल्ली के एमसीडी स्कूल शामिल नहीं हैं? उन्होंने कहा कि एमसीडी स्कूलों की हालत अत्यंत जर्जर है। किसी भी स्कूल में चले जाइए, वहां शौचालय और दीवारों की स्थिति खराब है। आज भी कई स्कूलों में बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। एमसीडी स्कूलों की यह हालत कब तक ठीक होगी?

प्रीति डोगरा ने कहा कि एमसीडी के स्कूलों में गरीब या मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे आते हैं, जिनके लिए 1670 रुपये की राशि बहुत बड़ी होती है। कई परिवार वर्ष 2025-26 में अपने बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ रहे।

प्रीति डोगरा ने मांग की कि तुरंत बच्चों के बैंक खातों में 1670 रुपये की राशि जारी की जाए। साथ ही, उन अधिकारियों और प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की जाए जिनकी वजह से बच्चों को यह राशि अब तक नहीं मिल पाई है। दोबारा ऐसी परेशानी न हो, इसके लिए एक समिति और टाइमलाइन तय की जाए ताकि हर वर्ष सत्र शुरू होने से पहले बच्चों को 1670 रुपये की राशि मिल सके। इससे वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकेंगे और माता-पिता बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकेंगे।

By editor

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