देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। पिछले करीब दो हफ्तों (13 दिनों) के भीतर सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन के दामों में कई बार बढ़ोतरी की है जिसका सीधा असर अब मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के मासिक बजट पर दिखने लगा है। आज यानि 28 मई 2026 को भी देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल अपने रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर बिक रहे हैं। आर्थिक जानकारों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते आने वाले दिनों में आम जनता को इससे राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है।
वहीं विमानन और ईंधन बाजार की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 13 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में लगभग 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक का भारी इजाफा दर्ज किया गया है। इस दौरान तेल कंपनियों ने चार अलग-अलग किश्तों में दाम बढ़ाए हैं।

इस बढ़ोतरी का नतीजा यह हुआ कि राजधानी दिल्ली में जो पेट्रोल कुछ समय पहले तक 94-95 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल रहा था वह अब 102 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर गया है। इसी तरह डीजल की कीमतों में भी करीब 8 रुपये का उछाल आया है।
जानें क्यों लग रही है तेल की कीमतों में आग?
भारत में ईंधन महंगा होने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। यह हैं वो कारण:
सबसे पहला मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालातों की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई प्रभावित हुई है जिससे कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है इसलिए वैश्विक बाजार की तेजी का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।

दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरती कीमत ने तेल का आयात और ज्यादा खर्चीला बना दिया है।
दिल्ली-NCR से लेकर मुंबई-पटना तक मचा हाहाकार
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में रोजाना लाखों लोग अपनी गाड़ियों से दफ्तर जाते हैं। तेल महंगा होने से उनके आने-जाने का खर्च काफी बढ़ गया है। वहीं, ऑटो और कैब चालकों का कहना है कि उनकी रोज की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ ईंधन के टैंक में ही चला जाता है। मुंबई और पटना में उपभोक्ताओं पर सबसे ज्यादा दबाव है। मुंबई और पटना में पेट्रोल की कीमतें पहले ही 110 रुपये प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास पहुंच चुकी हैं।

थम नहीं रहा महंगाई का सिलसिला
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ियों की टंकी तक सीमित नहीं रहता। जब ट्रांसपोर्टेशन (माल ढुलाई) महंगा होता है तो उसका सीधा असर फल, हरी सब्जियों, दूध, राशन और अन्य रोजमर्रा की जरूरी चीजों पर पड़ता है। पिछले कुछ दिनों में सीएनजी (CNG) और दूध के दाम भी बढ़े हैं जिसने घरेलू बजट को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। वहीं विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में एक और दौर की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
