हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार की ‘इंतजार करो’ की रणनीति पर हाईकोर्ट ने विराम लगा दिया है। पंचायत चुनावों को आगे खिसकाने की सरकार की योजना को बड़ा झटका देते हुए, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि गांव की सरकार चुनने में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह फैसला न केवल प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला है, बल्कि स्थानीय शासन की स्वायत्तता को लेकर एक बड़ा संदेश भी है।

क्या है अदालत का कड़ा आदेश?

न्यायालय ने लगातार तीन दिनों तक चली सघन दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित नहीं रखा, बल्कि सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं:

डेडलाइन तय: कोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 30 अप्रैल से पहले संपन्न करा ली जाए।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार इन चुनावों को लगभग छह महीने के लिए स्थगित करना चाहती थी।

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