रामपुर तिराहाकांड में आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए एक आंदोलनकारी का शव सूबुत मिटाने के लिए गंग नहर में बहाए जाने के मामले में बचाव पक्ष की ओर से सीबीआई के एसपी से जिरह की गई। घटना में तत्कालीन खतौली थाना प्रभारी समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया है। अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तिथि नियत की गई है।

एक अक्टूबर 1994 की रात पृथक राज्य की मांग को लेकर पुलिस का रामपुर तिराहे पर टकराव हो गया था। आरोप है टकराव होने पर पुलिस ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग कर दी। पुलिस फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी, जबकि महिलाओं से छेड़छाड़ व दुष्कर्म के आरोप भी लगे थे। आरोप था कि सुबूत मिटाने के उद्देश्य से उत्तराखंड के एक आंदोलनकारी राजेश नेगी का शव गंग नहर में बहा दिया गया था। इस मामले में सीबीअर ने विवेचना कर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक खतौली एसपी मिश्रा सहित चार लोगों को आरोपी बनाया था। घटना के मुकदमे की सुनवाई एसीजेएम प्रथम कोर्ट में चल रही है। गुरुवार को सीबीआई के एसपी राजेश चाहर कोर्ट में पेश हुए। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र शर्मा ने आंदोलनकारी का शव नहर में बहाकर पुलिस द्वारा सुबूत मिटाए जाने के मामले में जिरह की। इस मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट ने 16 फरवरी की तिथि नियत की है।

आंदोलनकारियों से फर्जी हथियार बरामदगी के मामले में एसीजेएम प्रथम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि सीबीआई ने आरोप लगाया था कि थाना झिंझाना के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ब्रजकिशोर ने आंदोलकारियों से जो हथियारों की बरामदगी दिखाई थी, वह फर्जी थी। उन्होंने बताया कि इस मामले में एसीजेएम प्रथम मयंक जायसवाल की कोर्ट में सुनवाई होगी।

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