राजधानी लखनऊ के मकदूमपुर क्षेत्र में बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति के नाम पर कथित भूमि घोटाले को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अब तक की जांच पर गंभीर असंतोष प्रकट किया है। अदालत ने यह संकेत दिया है कि वह इस मामले की विवेचना किसी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने पर विचार कर रही है।

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने समिति द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार (आगामी तिथि) को अगली सुनवाई तय की है। अदालत ने साफ कहा कि अब तक की जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं दिखती, जिससे जनता का विश्वास डगमगा सकता है। याचिका में वर्तमान निर्वाचित कार्यकारिणी को काम करने की अनुमति देने और पूर्व कार्यकारिणी को किसी भी प्रकार की कार्यवाही से रोके जाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व कार्यकारिणी के कार्यकाल में नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर भूखंडों का बंटवारा और विक्रय किया गया।

अदालत इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच चाहती है और इसके लिए सीबीआई या अन्य किसी केंद्रीय एजेंसी को विवेचना सौंपने का निर्णय ले सकती है।

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