केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने उन रिपोर्टों और सोशल मीडिया दावों को पूरी तरह गलत, भ्रामक और आधारहीन बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार मंदिरों, ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों के लिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम शुरू करने पर विचार कर रही है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव न तो मंजूर किया गया है और न ही इस तरह की कोई योजना विचाराधीन है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि मंदिरों के स्वर्ण भंडार के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी किए जाएंगे या इन भंडारों को “स्ट्रैटेजिक गोल्ड रिजर्व ऑफ इंडिया” का हिस्सा बनाया जाएगा—सरकार ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

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अफवाहों पर न करें विश्वास

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली खबरों और अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें साझा करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि नीतिगत फैसलों से जुड़ी सही जानकारी केवल आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों और सरकारी स्रोतों से ही प्राप्त करें।

इस बीच, प्रधानमंत्री से जुड़े एक कथित बयान को लेकर भी चर्चा रही, जिसमें नागरिकों से ऊर्जा और संसाधन बचत जैसे सुझावों की बात कही गई थी। हालांकि, ऐसे किसी भी सार्वजनिक संदेश या संदर्भ को लेकर आधिकारिक पुष्टि ही अंतिम मानी जाती है।

सोने का आयात

चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा बड़ा उपभोक्ता है। पिछले साल भारत ने 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया था जो । 2024-25 की तुलना में सोने का आयात 24 फीसदी बढ़ गया। सरकार ने इसे हतोत्साहित करने के लिए हाल में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।

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