पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आठ अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद, रविवार को भाबानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में पहला सामुदायिक जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। ममता ने भाजपा पर मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाने और लोगों को धार्मिक एवं जातिगत आधार पर विभाजित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया और निशाना साधा।

निर्वाचन क्षेत्र के लेडीज पार्क में आयोजित बैठक में ममता ने चुनावों को लोकतंत्र का उत्सव, न कि तानाशाही का बताया और विभिन्न समुदायों के लोगों से विधानसभा चुनावों से पहले एकजुट रहने का आग्रह किया। भाबानीपुर विधानसभा चुनाव 2026 के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक बनकर उभरा है, जहां इस सीट से तीन बार विधायक रह चुकीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी से है। इस मुकाबले का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यहां 2021 के नंदीग्राम चुनाव जैसा ही मुकाबला माना जा रहा है, जहां तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद अधिकारी ने बनर्जी को हराया था।

एक सामुदायिक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अल्पसंख्यक और प्रवासी समुदायों से संबंधित कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने ईसाई, मुस्लिम, सिख, जैन, सिंधी, गुजरात और बिहार के लोगों तथा इस्कॉन के सदस्यों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है, तानाशाही का नहीं।

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