भारत और अमेरिका का संयुक्त अंतरिक्ष मिशन NISAR अब दुनिया के बड़े शहरों में छिपे खतरों को उजागर किया है। जिसने पूरी  दुनिया को हैरत में डाल दिया है। इस मिशन ने हाल ही में Mexico City के नीचे हो रही जमीन की हलचल का बेहद सटीक नक्शा तैयार किया है, जिससे पता चलता है कि यह शहर तेजी से पाताल लोक में धंस रहा है।

धीरे-धीरे नीचे बैठता जा रहा शहर, ये है कारण
करीब दो करोड़ की आबादी वाला यह शहर एक सूखी झील की जमीन पर बसा है। लगातार बढ़ती आबादी और इमारतों का दबाव की वजह से जमीन कमजोर हो रही है। यही वजह है कि शहर धीरे-धीरे नीचे बैठता जा रहा है। इस समस्या को पहली बार 1925 में दर्ज किया गया था, लेकिन अब इसकी रफ्तार और भी बढ़ चुकी है।

PunjabKesari

हर महीने लगभग 2 सेंटीमीटर तक जमीन नीचे जा रही
बता दें कि 1990 और 2000 के दशक में शहर के कुछ हिस्सों में हर साल 35 सेंटीमीटर तक जमीन धंसने की बात सामने आई थी। अब NISAR सैटेलाइट के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कुछ इलाकों में हर महीने लगभग 2 सेंटीमीटर तक जमीन नीचे जा रही है।

NISAR सैटेलाइट जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया था। इसमें बेहद उन्नत रडार तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो बादलों, बारिश या घने जंगलों के बावजूद जमीन की सतह में हो रहे छोटे-छोटे बदलावों को भी पकड़ सकता है। यह सैटेलाइट बार-बार एक ही इलाके से गुजरकर समय के साथ हो रहे परिवर्तनों का रिकॉर्ड तैयार करता है।

PunjabKesari

 

इस मिशन की तस्वीरों में शहर के कई हिस्से गहरे नीले रंग में दिखाई दे रहे हैं, जो तेजी से धंसते इलाके है। खास तौर पर Benito Jusrez International Airport और उसके आसपास का इलाका ज्यादा प्रभावित दिखा है।

PunjabKesari

इसके अलावा Angel of Independence जैसे ऐतिहासिक स्थल भी इस समस्या की चपेट में हैं। 1910 में बनी इस प्रसिद्ध मूर्ति के आसपास जमीन धंसने के कारण अब तक 14 अतिरिक्त सीढ़ियां जोड़ी जा चुकी हैं।

PunjabKesari

NISAR के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर Craig Ferguson ने कहा कि ये तस्वीरें सैटेलाइट की ताकत को साफ दिखाती हैं। उन्होंने बताया कि लंबी वेवलेंथ वाली रडार तकनीक की मदद से यह सैटेलाइट घने जंगलों और समुद्र किनारे वाले इलाकों में भी जमीन धंसने और समुद्र के स्तर में हो रहे बदलावों को सटीक तरीके से ट्रैक कर सकता है।

वहीं, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट David Bekaert का कहना है कि NISAR के जरिए आने वाले समय में दुनिया भर में कई नई और अहम वैज्ञानिक जानकारियां सामने आएंगी, जो पृथ्वी में हो रहे बदलावों को बेहतर समझने में मदद करेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में इमारतों को गंभीर नुकसान हो सकता है, सड़कों और मेट्रो सिस्टम पर असर पड़ेगा और पानी की कमी भी बढ़ सकती है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights