मौलाना महमूद मदनी ने दहेज और फिजूल रस्मों के खिलाफ आवाज उठाई है। यूपी के शामली में आयोजित जलसे में उन्‍होंने कहा कि आज गमी और खुशी के मौकों पर ऐसी रस्में निभाई जा रही हैं जो इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फसाद करना कोई कमाल नहीं है, बल्कि माफ करना ही असली बहादुरी और कमाल है। इस जलसे में नशे और सामाजिक बुराइयों पर भी चिंता जताई गई। मौलाना मुफ्ती अफ्फान ने कहा कि आज का नौजवान नशे की लत में फंसता जा रहा है, जो समाज के लिए गंभीर खतरा है। वहीं, मौलाना अब्दुल मालिक मुगेसी ने तालीम की अहमियत पर जोर दिया।


सादगी अपनाने का किया आह्वान

इससे पहले मौलाना महमूद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि दहेज प्रथा और गैरजरूरी खर्च समाज को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से दहेज-मुक्त समाज बनाने और सादगी अपनाने का आह्वान किया।


‘ये रस्में इस्लाम की मूल शिक्षाओं के विपरीत’

मौलाना महमूद मदनी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से दहेज प्रथा और अनावश्यक खर्चों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, ये प्रथाएं न केवल आर्थिक बोझ डालती हैं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये रस्में इस्लाम की मूल शिक्षाओं के विपरीत हैं। उन्होंने लोगों से एक ऐसे समाज का निर्माण करने का आग्रह किया जो दहेज से मुक्त हो।

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