अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित नए परमाणु समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार जो समझौता तैयार कर रही है, वह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) के समय हुए परमाणु समझौते से बिल्कुल अलग होगा। ट्रंप ने ओबामा प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि उस समझौते ने ईरान को भारी मात्रा में नकद पैसा दिया और परमाणु हथियार बनाने का रास्ता खोल दिया। उन्होंने इसे “अमेरिका के इतिहास का सबसे खराब समझौता” बताया। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ईरान को किसी तरह की नकद राहत नहीं देगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वार्ता बेहद पेशेवर और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है तथा अमेरिका जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा।
ट्रंप ने साफ किया कि जब तक समझौता पूरी तरह अंतिम रूप लेकर हस्ताक्षरित नहीं हो जाता, तब तक ईरान पर लगाया गया अमेरिकी ब्लॉकेड जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को समय लेकर सही फैसला करना चाहिए, क्योंकि “यहां किसी गलती की गुंजाइश नहीं है।” ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।उन्होंने मध्य पूर्व के देशों सऊदी अरब, यूएई, कतर और अन्य सहयोगियों का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि अब्राहम अकॉर्ड्स को और मजबूत किया जाएगा। ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया कि भविष्य में ईरान भी इस समझौते का हिस्सा बन सकता है।
इस बीच अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने ट्रंप की रणनीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी दीर्घकालिक समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि सऊदी अरब समेत अन्य मुस्लिम देश इजराइल के साथ संबंध सामान्य करें। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बताया कि उन्होंने ट्रंप से होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते को लेकर बातचीत की है। नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप ने इजराइल की सुरक्षा के प्रति अपना मजबूत समर्थन दोहराया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु कार्यक्रम सीमित करने को लेकर तेज कूटनीतिक बातचीत चल रही है।
