हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU), कानपुर ने छात्रों की अनुशासनहीनता पर ऐसी सजा सुनाई है जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है। यूनिवर्सिटी ने मारपीट के दोषी 11 छात्रों को निलंबित करने या निष्कासित करने की बजाय उन्हें 15 दिन कैंपस में बागवानी करने का आदेश दिया है। यह फैसला छात्रों को सुधारने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है।

‘नमस्कार’ को लेकर हुई लड़ाई, अब छात्र लगाएंगे पौधे
दरअसल, HBTU के थर्ड ईयर और फाइनल ईयर के छात्रों के बीच मामूली सी बात को लेकर विवाद हो गया था। बताया जा रहा है कि “नमस्कार न करने” की बात पर बहस शुरू हुई, जो मारपीट तक पहुंच गई। पहले गुरुदेव चौराहे पर झगड़ा हुआ, फिर छात्र हॉस्टल लौटे तो वहां भी तनातनी और झड़प हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच की और दोनों पक्षों को दोषी पाया। सख्त रुख अपनाते हुए स्टूडेंट वेलफेयर डीन प्रोफेसर आलोक कुमार ने सभी 11 छात्रों को मिड सेमेस्टर परीक्षा से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, दीपावली की छुट्टियों के बाद इन छात्रों को यूनिवर्सिटी कैंपस में 15 दिन तक बागवानी करने की सजा दी गई है।

HBTU में बिना निष्कासन मिली अनोखी सजा
इस पहल की पूरे राज्य में सराहना हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों और आम लोगों का कहना है कि इस तरह की सुधारात्मक सजा से छात्रों का भविष्य खराब नहीं होगा और उनमें अनुशासन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी। यूनिवर्सिटी का मानना है कि इस तरह की सकारात्मक सजा न केवल छात्रों को उनके व्यवहार के प्रति सचेत करेगी, बल्कि परिसर को हरा-भरा बनाने में भी मदद मिलेगी।

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