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देहरादून, 21 अगस्त । उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक मनोज रावत के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम से मुलाकात कर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) के तहत मतदाता सूचियों में कथित विसंगतियों और फर्जी आपत्तियों का मुद्दा उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने सहित विभिन्न मांगें रखीं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार संपादित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिन जिलों में दावे एवं आपत्तियां अधिक संख्या में प्राप्त हुई हैं, वहां नौ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में अतिरिक्त तैनाती दी गई है। इसके अलावा मंडलायुक्त गढ़वाल और कुमाऊं को मतदाता सूची के पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात तत्वों की ओर से थोक में फर्जी फॉर्म-7 दाखिल कर मूल निवासियों, वैध मतदाताओं और वर्तमान विधायकों तक के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कथित शिकायतकर्ताओं ने हलफनामा देकर आपत्ति दर्ज कराने से इनकार किया है।

मनोज रावत ने कहा कि नियमों के अनुसार एक व्यक्ति अधिकतम पांच आपत्तियां दे सकता है, लेकिन एक ही नाम और आईडी से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने ऊधम सिंह नगर में डेमोग्राफिकली/फोटो सिमिलर एंट्रीज के आधार पर करीब 1,02,793 मतदाताओं के नाम संदिग्ध बताए जाने का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि वैध मतदाताओं के नाम बिना ठोस आधार के हटाना लोकतंत्र की हत्या है। कांग्रेस इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। रावत ने चेतावनी दी कि 15 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले फर्जी आपत्तियां निरस्त कर वैध मतदाताओं के नाम बहाल नहीं किए गए तो कांग्रेस सड़क से अदालत तक लड़ाई लड़ेगी।

प्रतिनिधिमंडल ने फॉर्म-7 के तहत नाम हटाने की कार्रवाई को जांच पूरी होने तक स्थगित करने, संबंधित मतदाताओं को व्यक्तिगत नोटिस देकर सुनवाई का अवसर देने और विवादित कटौतियों और कथित फर्जी आपत्तियों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच और ऑडिट कराने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी, प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह गोगी, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह और सुजाता पाल शामिल रहे।

By editor

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