प्रयागराज से संगम स्नान किए बिना वापस काशी पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरनंद सरस्वती ने कहा कि 11 दिनों तक अवसर दिया गया कि वह अपनी गलती सुधार लें। लेकिन गलती को नहीं सुधारा गया। शंकराचार्य के स्नान के साथ ही सभी सनातन धर्मियों का स्नान पूर्ण होता है। लेकिन बिना स्नान किए वापस आने से पूर्णाहुति नहीं हुई, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके साथ ही डिप्टी सीएम के प्रयागराज आने के विषय में भी बोले। उन्होंने कहा कि किसी के भेजने से वह आए थे। उनके स्वयं का विवेक नहीं है। इस मौके पर अविमुक्तेश्वरनंद सरस्वती ने यूजीसी पर भी बयान दिया। मठ में उन्होंने पूजा अर्चना की।

किसी के कहने से आए थे डिप्टी सीएम

प्रयागराज से काशी पहुंचे अविमुक्तेश्वरनंद डिप्टी सीएम के प्रयागराज आने के संबंध में उन्होंने कहा है कि किसी के कहने से वह यहां आए हैं, जिसका अर्थ है कि उनका स्वयं का विवेक नहीं है। सरकार के प्रतिनिधि को स्पष्ट स्टैंड लेना चाहिए। जो डिप्टी सीएम नहीं ले पाए।

चारों पीठों के शंकराचार्य एक

अविमुक्तेश्वरनंद सरस्वती ने कहा कि चारों पीठों के शंकराचार्य की एकता को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है जबकि यह वास्तविकता से विपरीत है। चारों शंकराचार्य सदा एक हैं। सनातन परंपरा में शंकराचार्य का स्थान सर्वोच्च है।

यूजीसी समाज को लड़ाने वाला

यूजीसी को लेकर अविमुक्तेश्वरनंद सरस्वती ने कहा कि यह समाज को लड़ने वाला विषय है। एक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा किया जा रहा है। आपस में लड़ाकर हिंदू समाज को कमजोर करने का रास्ता है। मंच से “बांटोगे तो काटोगे” की बात कही जाती है, लेकिन हकीकत में बांटने और काटने की मशीन लाई जा रही है।

आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा

अविमुक्तेश्वरनंद सरस्वती ने काशी मठ में संतों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की और गौ रक्षा आंदोलन के विषय में भी चर्चा की। इस मौके पर प्रयागराज में हुई घटनाओं पर भी आपस में बातचीत की गई। उन्होंने गौ हत्या को बंद करने को लेकर बड़ा बयान दिया और कहा कि केंद्र और राज्य की सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है। गौ हत्या के मुद्दे को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

गौ रक्षा के लिए उनका आंदोलन चलता रहेगा

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा किसी सरकार, नेता, या राजनीतिक दल से संचालित नहीं होती है। हम रुकने वाले नहीं हैं। गौ माता की रक्षा के लिए आगे बढ़ेंगे। ‌
प्रयागराज में हुई घटना को लेकर भी उन्होंने बयान दिया। बोले माघ मेले के दौरान जो कुछ भी हुआ उसका पूरा सच सामने नहीं आया है। केवल एक अंश देखा गया। यदि पूरा वीडियो सामने आता तो तस्वीर कुछ और होती। घटना को लेकर एक पुलिसकर्मी को डांट पड़ी जबकि दूसरा सस्पेंड हुआ। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही नया है? क्या कोई स्वतंत्र जांच दल गठित किया गया है?

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