सीधी। एमपी के सीधी के मूत्र विसर्जन कांड में राजनीति जारी है। भोपाल से लौटे पीडि़त आदिवासी का जिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने गंगाजल से शुद्धिकरण किया। कहा, पेशाब चेहरे पर की गई थी और धोया पांव गया। उधर, घटना से आहत कोल समाज के नेता और भाजपा महामंत्री विवेक कोल ने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रदेश अध्यक्ष को भेजे पत्र में कहा, घटना के बाद तीन दिन से सो नहीं पाया। विधायक केदारनाथ को आड़े हाथों लेते हुए कहा, उनके कृत्यों से आहत हूं। इस बीच आरोपी प्रवेश शुक्ला के पिता और चाचा की करतूत भी सामने आ गई है।
इधर पीड़ित ने बताया है कि ये घटना सन 2020 की है। पीड़ित के मुताबिक प्रवेश शुक्ला ने पेशाब किया और दीनदयाल ने इसका वीडियो बनाया। बाद में खुद प्रवेश ने भी कहा कि उसने पेशाब किया है। पीड़ित ने बताया कि कलेक्टर के सामने और थाने में दिए गए शपथपत्र में उससे दबाव डालकर झूठ बुलवाया गया।
पीड़ित ने बताया कि वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है जिसका प्रवेश के पिता रमाकांत और चाचा विद्या शुक्ला ने फायदा उठाया। प्रवेश के चाचा ने स्टांप पर दस्तखत करवा लिए, इसमें क्या लिखा था, हमको कुछ पता नहीं था।
इधर पीड़ित को राज्य सरकार ने 5 लाख रुपए की सहायता राशि का चेक दिया है। आवास के लिए भी कलेक्टर साकेत मालवीय और एसपी डॉ रविंद्र वर्मा ने पीड़ित को डेढ़ लाख रुपए का चेक दिया।
कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य दिग्विजय ने एक साल पुराना ट्वीट रिट्वीट किया है। वीडियो में आदिवासी परिवार आरोप लगा रहा है कि विधायक केदार ने उनकी जमीन हड़प ली। जमीन रीवा रियासत के जमाने से उनके पास है। 1972 के बाद कागजों में हेराफेरी कर जमीन से मालिकाना हक चला गया।

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