हिंदू धर्म में हर एक एकादशी अपना एक खास महत्व है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इस साल अपरा एकादशी 13 मई, 2026 यानी आज के दिन मनाई जाएगी। इस दिन सच्चे मन विष्णु जी की पूजा करने और व्रत रखने से सभी पाप मिट जाते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन पूजा के साथ अपरा एकादशी की कथा जरूर पढ़नी चाहिए। तो आइए जानते हैं अपरा एकादशी की कथा के बारे में-
अपरा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था। उसका छोटा भाई वज्र ध्वज बड़ा ही क्रूर, अधर्मी और अन्यायी था। वह अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था। उस पापी ने एक दिन रात्रि में अपने बड़े भाई की हत्या करके उसकी देह को एक जंगली पीपल के नीचे गाड़ दिया। इस अकाल मृत्यु से राजा प्रेतात्मा के रूप में उसी पीपल पर रहने लगा और अनेक उत्पात करने लगा। एक दिन अचानक धौम्य नामक ऋषि उधर से गुजरे, उन्होंने प्रेत को देखा और तपोबल से उसके अतीत को जान लिया। अपने तपोबल से प्रेत उत्पात का कारण समझा। सब कुछ जान लेने के बाद ऋषि ने प्रसन्न होकर उस प्रेत को पीपल के पेड़ से उतारा और परलोक विद्या का उपदेश दिया। दयालु ऋषि ने राजा की प्रेत योनि से मुक्ति के लिए स्वयं ही अपरा एकादशी का व्रत किया और उसे अगति से छुड़ाने के लिए उसका पुण्य प्रेत को अर्पित कर दिया। जिस पुण्य के प्रभाव से राजा को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई। वह ऋषि को धन्यवाद देता हुआ दिव्य देह धारण कर पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग को चला गया। कहते हैं कि अपरा एकादशी की कथा पढ़ने अथवा सुनने से मनुष्य सब पापों से छूट जाता है और उसे मुक्ति मिलती है।
अपरा एकादशी की महिमा
एक बार अर्जुन ने श्रीकृष्ण जी से कहा हे प्रभु! जयेष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है?और उसकी महिमा के बारे में बताएं? फिर श्री कृष्ण ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की महिमा बताते हुए कहा कि ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम अपरा एकादशी है क्योंकि यह अपार धन, पुण्यों को देने वाली तथा समस्त पापों का नाश करने वाली है, जो मनुष्य अपरा एकादशी का व्रत करते हैं उनकी लोक में प्रसिद्ध होती है। अपरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या, प्रेत योनि,दूसरे की निंदा आदि से उत्पन्न पापों का नाश हो जाता है। इस व्रत कथा के पठन व श्रवण करने मात्र से ही सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है, अतः मनुष्य को इस एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत सभी व्रतों में उत्तम माना गया है। अपरा एकादशी के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए, जिसके प्रभाव से मनुष्य को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
