नई दिल्ली, 10 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन में शामिल 14 साल की लड़की को डराने-धमकाने और परेशान करने वाले लोगों के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि लड़की और उसके परिवार के सदस्यों को डराने-धमकाने का आरोप एक गंभीर मामला है।
ये लड़की तब चर्चा में आयी जब स्वतंत्र भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के दौरान लड़की के पिता की पिटाई की थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) और 126 और पॉक्सो कानून के तहत एफआईआर दर्ज किया गया था। स्वतंत्र भारद्वाज ने भाजपा और एनडीए नेताओं से नजदीकी का भी दावा किया था।
इस पॉडकास्ट के बाद सीजेपी और कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब स्वतंत्र भारद्वाज ने खुद ही पॉडकास्ट पर आरोप कबूल किया है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इस प्रदर्शन के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को यूपी के बुलंदशहर में गिरफ्तार किया गया था। स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो कानून और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सीजेपी ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग सादी वर्दी में लाठी और डंडे लेकर आए थे और प्रदर्शनकारियों पर हमलों को अंजाम दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान की स्वतंत्र भारद्वाज की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।
