नई दिल्ली, 18 जुलाई । दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायिक सेवा में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए साकेत कमर्शियल कोर्ट की न्यायाधीश वीणा रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने तीस हजारी कोर्ट के न्यायाधीश विनय सिंघल को भी निलंबित किया था।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान न्यायाधीश वीणा रानी को साकेत कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज) के कार्यालय से संबद्ध (अटैच) किया गया है। साथ ही उन्हें सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना दिल्ली की सीमा से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कार्रवाई ऑल इंडिया सर्विसेज (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 3(1)(ए) तथा दिल्ली हायर जुडिशियल सर्विस रूल्स के नियम 27 के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए की है। इन प्रावधानों के अनुसार, किसी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध जांच या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित रहने की स्थिति में उसे निलंबित किया जा सकता है।
इससे पहले उच्च न्यायालय ने तीस हजारी कोर्ट के न्यायाधीश विनय सिंघल को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था। उनके संबंध में जारी आदेश में कहा गया था कि निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय), तीस हजारी कोर्ट, दिल्ली का कार्यालय रहेगा। साथ ही उन्हें भी सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर जाने पर रोक लगाई गई है।
अदालत के आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में संबंधित न्यायिक अधिकारियों को लागू नियमों के तहत निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) तथा अन्य देय भत्ते नियमानुसार प्रदान किए जाएंगे।
