मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले 5 कांग्रेस विधायकों का भाजपा के वरिष्ठ नेता व विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात को लेकर सियासत गरमा गई है। सभी विधायक कांग्रेस नेता व राज्य सभा के प्रबल दावेदार कमलनाथ के गृह जिले यानी छिंदवाड़ा के हैं। सभी ने बंद कमरे में विधानसभा अध्यक्ष से सामूहिक मुलाकात की है। क्रॉस वोटिंग की की आशंका के बीच इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई है।
दरअसल, छिंदवाड़ा से चौरई विधायक सुजीत चौधरी, सौसर विधायक विजय चौरे, परासिया विधायक सोहन वाल्मीक, पांढुर्ना विधायक नीलेश उइके ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर से मुलाकात की है। हालांकि विधायक इसे सामान्य मुलाकात बता रहे हैं। उनके मुताबिक, अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास और वित्तीय संसाधनों की मांग को लेकर उन्होंने शिष्टाचार भेंट की है, लेकिन राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस मुलाकात को चर्चाओं का बाजार गरमा गया है।

कांग्रेस खेमें में मुलाकात ने बढ़ाई टेंशन
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस खेमें में टेंशन बढ़ गई है। क्योंकि जून माह में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मतदान होना है। आकड़ों के हिसाब से दो सीटे भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पाले में आने वाली है, लेकिन 5-7 विधायक इधर से उधर होते हैं तो कांग्रेस की यह सीट भी उनके हाथ से जा सकती है ऐसे में कांग्रेस विधायकों का विधानसभा अध्यक्ष से एक साथ मिलना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।
विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद फिर साथ दिखे सभी
खास बात यह कि सभी विधायकों ने पेंच के रिसॉर्ट में मुलाकात की थी, बंद कमरे में हुई इस मुलाकात की चर्चाएं अभी हो ही रही थी कि इसके बाद सभी विधायक विधानसभा अध्यक्ष से एक साथ मिले ऐसे में राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं चली थीं। सूत्रों की मानें तो यह कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं है क्योंकि राजनीतिक मुलाकात को केवल औपचारिक कार्यक्रम मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वहीं विधायकों के कहना है कि सर्किट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान कांग्रेस विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विधायकों का कहना था कि भाजपा विधायकों को विशेष विकास कार्यों के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई गई है, जबकि विपक्षी क्षेत्रों को ऐसी सुविधा नहीं मिल रही। विधायकों का कहना है कि जनता ने हमें भी समान अधिकारों के साथ चुनकर विधानसभा भेजा है, इसलिए विकास योजनाओं में राजनीतिक आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे इस विषय में सरकार और संबंधित विभागों से चर्चा कर कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों के लिए भी पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने का प्रयास करें।
