उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद में बुधवार शाम आए भीषण आंधी, बारिश और तूफान ने भारी तबाही मचा दी. शहर से लेकर गांव तक हर तरफ बर्बादी के निशान दिखाई दे रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा. इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है.

तूफान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका ब्लैकआउट में तब्दील हो गया. जगह-जगह बिजली के खंभे उखड़ गए, दीवारें ढह गईं और कई मकानों को भारी नुकसान पहुंचा. रेलवे स्टेशन परिसर में लगे भारी बोर्ड और पेड़ गिरने से ट्रेनों के संचालन के लिए लगी ओएचई लाइनें भी टूटकर गिर गईं.

गंगा नदी पर बना पीपा पुल भी तूफान की चपेट में आकर दो हिस्सों में बंट गया. सड़क पर चल रहे चार पहिया वाहन तेज हवाओं के चलते डगमगाने लगे, जबकि दो पहिया वाहन चालक गिरते-पड़ते अपनी जान बचाते नजर आए. इस आपदा में दर्जनभर से अधिक लोगों की मौत की खबर है, वहीं बड़ी संख्या में मवेशियों की भी जान चली गई.

प्रत्यक्षदर्शी यदुवेंद्र राय उर्फ काका ने बताया कि वह लोग बातचीत कर रहे थे, तभी अचानक तेज आंधी आई और कंपनी का भारी बोर्ड गिर पड़ा. उन्होंने कहा कि ऊपर वाले की कृपा रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ.

55 वर्षीय प्रत्यक्षदर्शी शिव नारायण ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा भयावह दृश्य कभी नहीं देखा. उनके मुताबिक भीषण गर्मी के बीच अचानक घना अंधेरा छा गया और बड़े-बड़े सांकेतिक बोर्ड कागज की तरह उड़ने लगे.

प्रत्यक्षदर्शी अवनीश कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह की भयावह घटनाएं अब तक केवल ओडिशा या दक्षिण भारत के समुद्री इलाकों में सुनने को मिलती थीं, लेकिन बुधवार को भदोही समेत यूपी के कई जिलों में प्रकृति का ऐसा तांडव देखने को मिला, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी.

वहीं प्रमोद पाण्डेय ने बताया कि हालात इतने भयावह थे कि लोगों को लगा अब बचना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि पूरा जनपद ऐसी त्रासदी पहले कभी नहीं झेल पाया.

फिलहाल प्रशासन राहत और पुनर्वास कार्य में जुटा हुआ है. हालांकि बिजली व्यवस्था और यातायात को पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है. पूरा जनपद इस संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तबाही के निशान अब भी हर तरफ साफ दिखाई दे रहे हैं.

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