उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट का विस्तार बीती 10 मई को हुआ था. हालांकि 6 दिन बीतने को हैं लेकिन अभी तक विभागों का बंटवारा नहीं हुआ है. सपा तंज कस रही है और बीजेपी बचाव मुद्रा में है, इन सबके बीच दिल्ली से लखनऊ तक दौरे जारी है.

बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. फिर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से. माना जा रहा था कि इन मुलाकातों के बाद स्थित साफ हो जाएगी. हालांकि इन मुलाकातों को भी दो दिन बीतने को हैं.

ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पेंच कहां फंसा है?

सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी साल 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए विभागों का आवंटन करना चाहती है. वह जनता में यह संदेश नहीं देना चाहती कि उसने सिर्फ चुनावी और सियासी समीकरण के नजरिए से काबीना का विस्तार किया है.

इन लोगों को अच्छे विभाग देना चाहती है बीजेपी

बीजेपी, यूपी इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को भी अच्छा विभाग देना चाहती है और सुरेंद्र दिलेर को भी ताकि  2027 के लिहाज से पश्चिमी यूपी और मजबूत हो.

इसके साथ बीजेपी, सपा के बागियों में से एक मनोज पांडेय को भी अच्छा विभाग देने का मन बना रही है. इसके जरिए वह न सिर्फ ब्राह्मणों के बीच अपनी पैठ और मजबूत तो करेगी ही साथ ही रायबरेली में वह एक और नेता स्थापित करने की कोशिश में है.

रायबरेली में बीजेपी के पास अभी अदिति सिंह और दिनेश प्रताप सिंह हैं. अदिति जहां विधायक हैं तो वहीं दिनेश, राज्य मंत्री. रायबरेली, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है ऐसे में बीजेपी यहां आगामी चुनाव के नजरिए से मनोज पांडेय पर कोई ऐसा फैसला नहीं करना चाहती जो सिर्फ कोरम भर लगे.

अब ये अच्छे विभाग जिन मौजूदा मंत्रियों के पास हैं, अगर उनसे लिए जाएं तो उनके नाराज होने का भी खतरा है, ऐसे में बीजेपी सोच समझकर फैसला करने के मूड में हैं. सूत्रों की मानें तो बीजेपी ‘देर आए, दुरुस्त आए’ वाले मोड में काम करते हुए विभागों का बंटवारा करना चाहती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अगली कैबिनेट बैठक से पहले यह देर, दुरुस्त होती है या अभी और देरी होगी?

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