तमिलनाडु में कपास और सूत की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री विजय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कपास की कमी और बढ़ती व्यापारिक गतिविधियों की वजह से वस्त्र उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा हैं।

मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कहा कि तमिलनाडु देश का सबसे बड़ा वस्त्र और परिधान निर्यातक राज्य है। यहां लाखों लोग इस उद्योग से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों की महिलाओं की भी है, जिनकी आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर करती हैं।

 

बता दें कि पिछले कुछ महीनों में कपास की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, कपास की कीमत दो महीने पहले 54,700 रुपये प्रति कैंडी थी, जो अब बढ़कर 67,700 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गई है। यानी करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली हैं।

 

वहीं सूत की कीमत भी 301 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की वजह से उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ रहा हैं।

 

गौरतलब है कि भारत का वस्त्र उद्योग वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभाता है और तमिलनाडु इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र माना जाता है। राज्य के कई शहर जैसे तिरुपुर, कोयंबटूर और इरोड वस्त्र उत्पादन और निर्यात के लिए देशभर में जाने जाते हैं।

 

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि मौजूदा स्थिति में उद्योग को लगातार कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए कपास का आयात जरूरी हो गया है। हालांकि, कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क लगने की वजह से उद्योग को राहत नहीं मिल पा रही हैं।

 

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि कपास पर लगने वाले आयात शुल्क को तत्काल प्रभाव से शून्य किया जाए, ताकि उद्योग को सस्ती दरों पर कच्चा माल मिल सके। उनका कहना है कि इससे निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी और भारतीय वस्त्र उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बना रहेगा।

 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र के बाद वस्त्र और परिधान उद्योग तमिलनाडु में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि लाखों लोगों की नौकरियों और पूरे वस्त्र उद्योग श्रृंखला की स्थिरता को सुरक्षित रखा जाए।

 

मौजूद जानकारी के अनुसार, उद्योग संगठनों ने भी कपास की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है और केंद्र सरकार से जल्द राहत देने की मांग की हैं।

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