केंद्र सरकार ने घरेलू बाजारों में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कच्ची (Raw), सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह रोक 30 सितंबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और ईंधन बाजार अस्थिर बने हुए हैं।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने बुधवार (13 मई) को एक अधिसूचना जारी कर पुष्टि की कि निर्यात पर यह रोक सितंबर 2026 के अंत तक या अगले आदेश तक जारी रहेगी। यह घोषणा पहले के उस रुख से एक स्पष्ट बदलाव का संकेत है, जिसमें घरेलू उत्पादन अधिक होने की उम्मीद के आधार पर सीमित चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी। अधिकारियों का अब मानना ​​है कि अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियां और बढ़ते मुद्रास्फीति के जोखिम अधिक कड़े हस्तक्षेप की मांग करते हैं।

विशिष्ट कोटे और जारी शिपमेंट के लिए छूट

DGFT की अधिसूचना के अनुसार, तरजीही कोटा समझौतों के तहत यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। अग्रिम प्राधिकरण योजना (Advance Authorisation Scheme), सरकार-से-सरकार सौदों और उन खेपों के तहत आने वाले शिपमेंट को भी अनुमति दी जाएगी जो पहले से ही भौतिक निर्यात प्रक्रिया से गुजर रही हैं।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उन खेपों को मंजूरी दी जाएगी जिनकी लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो गई थी, या यदि माल प्रतिबंध लागू होने से पहले सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया था। अधिसूचना में आगे कहा गया है, “चीनी का निर्यात भारत सरकार द्वारा अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए दी गई अनुमति के आधार पर, और उनकी सरकारों के अनुरोध पर ही किया जाएगा।”

मानसून और उर्वरक आपूर्ति को लेकर चिंताएं

अधिकारी देश की चीनी की स्थिति को लेकर तेजी से सतर्क दिखाई दे रहे हैं, खासकर यदि आने वाला मानसून का मौसम कमजोर रहता है, या यदि भू-राजनीतिक तनावों के कारण उर्वरक की आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान आता है। अल नीनो की स्थितियों से जुड़ी सामान्य से कम वर्षा की संभावना ने 2026-27 के चक्र के दौरान चीनी उत्पादन में संभावित गिरावट को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण उर्वरक की कमी चीनी के आपूर्ति-मांग संतुलन को और अधिक बिगाड़ सकती है। कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद यह कदम उठाया गया है।

 

यह बैन नई दिल्ली द्वारा सोने और दूसरी कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के ठीक एक दिन बाद आया है। यह कदम गैर-ज़रूरी इंपोर्ट को रोकने और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए उठाया गया था। जानकारों का मानना ​​है कि ये दोनों कदम सरकार की उस बड़ी रणनीति को दिखाते हैं, जिसका मकसद अर्थव्यवस्था को बाहरी उतार-चढ़ाव से बचाना है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वैश्विक बाज़ार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और कमोडिटी व शिपिंग नेटवर्क पर पड़ने वाले उसके असर पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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