जोनी शर्मा
होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर में हुआ प्रेरणादायक कार्यशाला का आयोजन
मुजफ्फरनगर। होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर में आज विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उनमें सकारात्मक जीवन मूल्यों का संचार करने के उद्देश्य से ‘युवा जागृति मिशन’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य वक्ता इंजीनियर श्रीपाल तोमर, रोहिणी दिल्ली रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता श्रीपाल तोमर, विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवेंद्र दहिया, राजकुमार मलिक, नितिन कुमार एवं योग शिक्षक सतकुमार जी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता श्रीपाल तोमर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए बुरी आदतों का त्याग करना और अच्छी आदतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है, जब अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच और अनुशासन के माध्यम से एक सफल व्यक्तित्व का निर्माण किया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को विशेष रूप से गलत संगति से बचने और अच्छे मित्रों का चुनाव करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा अवस्था में अपनाई गई आदतें व्यक्ति के भविष्य को प्रभावित करती हैं। गलत संगति में पड़कर विद्यार्थी नशे जैसी बुरी आदतों के शिकार हो सकते हैं, जिससे उनका भविष्य और जीवन दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही अच्छे मित्रों के साथ रहना चाहिए तथा अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए।
श्रीपाल तोमर ने डिजिटल युग में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के विवेकपूर्ण उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में अनावश्यक समय व्यतीत करने के बजाय अपनी पढ़ाई, शारीरिक गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देना चाहिए। तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने और अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, नियमित दिनचर्या और निरंतर अभ्यास का महत्व समझाते हुए कहा कि समय पर उठना, समय पर सोना तथा पढ़ाई के लिए निश्चित समय निर्धारित करना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विद्यार्थी यदि नियमित रूप से अध्ययन करें, अनुशासन का पालन करें और कठिन परिश्रम को अपनी आदत बना लें, तो वे निश्चित रूप से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में प्रसन्न रहने, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा प्रत्येक परिस्थिति में धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अनुशासन, कठिन परिश्रम, अच्छे संस्कार और नियमित अभ्यास ही सफलता के मूल मंत्र हैं।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बुरी आदतों, नशे और गलत संगति से दूर रहने के लिए जागरूक करना तथा उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, समय प्रबंधन और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की भावना विकसित करना रहा।
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवेंद्र दहिया ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण एवं सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, संस्कारवान और सफल नागरिक बनाना भी है।
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने जीवन में अच्छी आदतें अपनाने, बड़ों का सम्मान करने, समय का सदुपयोग करने तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा मिली।
