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लखनऊ, 21 मार्च । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अन्नदाता किसान को ‘यूपी का विधाता’ बना कर उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदेश बना दिया। 2017 से पहले जो किसान आत्महत्या पर मजबूर था, वह आज कर्जमुक्त होकर सम्मान के साथ फिर उत्पादक की श्रेणी में खड़ा है। सीएम योगी की नजर में किसानों की अहमियत इसी से पता चलती है कि उन्होंने अपना सबसे पहला फैसला किसान हित में ही लिया था। 2017 में सत्ता संभालते ही अन्नदाताओं की ऋणमाफी के निर्णय से 86 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए। किसान को संबल मिला तो यूपी की कृषि विकास दर जो 2016-17 में मात्र साढ़े 8 प्रतिशत थी, 2025-26 में बढ़कर 18 फीसदी हो गई। उत्तर प्रदेश के नव निर्माण के 9 वर्षों में फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि, कृषि यंत्र अनुदान, ट्यूबवेल को मुफ्त बिजली जैसी अनेक योजनाओं में किसानों को मजबूत किया गया।

–कृषि विकास में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य यूपी

अब यूपी कृषि विकास में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि का महज 11 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश 21 प्रतिशत का योगदान करता है। यह उपलब्धि किसानों को राज्य में मिल रहे प्रोत्साहन का नतीजा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 353.14 लाख बीमित किसानों को 5660.33 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है। पीएम कुसुम योजना के तहत 86,128 सोलर पंप स्थापित किए गए। किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत 2024-25 तक 437.68 लाख किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 70.36 लाख किसान क्रेडिट कार्ड विभिन्न बैंकों द्वारा किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। 2024-25 तक 12,64,189.21 करोड़ रुपये का फसली ऋण वितरण किया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत खरीफ 2025 में 45,448.33 करोड़ रुपये तथा रबी में फरवरी 2026 तक 88,720.67 करोड़ रुपये फसली ऋण का वितरण विभिन्न बैंकों द्वारा किसानों को किया गया है। उत्तर प्रदेश में 2,88,70,495 किसानों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 1,99,42,798 फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा चुकी हैं।

–पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त तक यूपी के किसानों के खाते में आए 99003.69 करोड़ रुपये

विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ सर्वाधिक उत्तर प्रदेश के किसानों को मिल रहा है। अभी तक इसकी 22 किस्तों में य़हां के किसानों को 99003.69 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। देश के कुल लाभार्थियों में लगभग 23 प्रतिशत किसान उत्तर प्रदेश से हैं, जो इस योजना में प्रदेश की बड़ी भागीदारी को दर्शाता है।

–अनुदान पर किसानों को बीज वितरित करा रही योगी सरकार

योगी सरकार का लागत कम और उत्पादन अधिक पर जोर है। किसानों के उत्पादन व आय में वृद्धि करने के लिए तत्पर कृषि विभाग ने 9 वर्ष में 556.09 लाख कुंतल बीजों का वितरण कराया। 2023-24 से निःशुल्क दलहन-तिलहन बीज मिनीकिट वितरण किया जा रहा है। डेढ़ वर्ष में 20.14 लाख तिलहन व 2.07 लाख दलहन किटों का वितरण किया गया। इस अवधि में लगभग 6.21 लाख से अधिक श्रीअन्न मिनीकिट भी दी गईं। 2017-18 से अब तक 840.97 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया।

–योगी सरकार का कृषि यंत्र वितरण पर भी जोर

योगी सरकार किसानों को खेती के लिए अनुदान पर कृषि यंत्र भी वितरित करती है। 2017-18 से 2024-25 तक 2.31 लाख से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण किया गया। 8405 कस्टम हायरिंग सेंटर व 7351 फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना हुई। फरवरी 2025-26 तक 8958 कृषि यंत्र दिए गए और 317 कस्टम हायरिंग सेंटर व 79 फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना कराई जा चुकी है। किसान पाठशाला के तहत लगभग 2.10 करोड़ किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

–दुग्ध उत्पादन में भी नंबर-1

–राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश, 2030 तक दुधारू पशुओं की उत्पादकता को दोगुना कर देश में सर्वोच्च बनाने का लक्ष्य है।

दुग्ध उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश नंबर-1 है। 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक दुग्ध उत्पादन में 388.15 लाख मीट्रिक टन के साथ उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है, जो लगभग 16.2 प्रतिशत का योगदान देश के कुल दुग्ध उत्पादन में करता है। यूपी को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाए रखने के लिए नंद बाबा दुग्ध मिशन लागू है। 2030 तक दुधारू पशुओं की उत्पादकता को दोगुना कर देश में सर्वोच्च बनाने का लक्ष्य है। वहीं निराश्रित गोवंश संरक्षण पर भी योगी सरकार का जोर है। कुल 7,451 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,181 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना में 1.82 लाख से अधिक गोवंश पशुपालकों को सुपुर्द किए गए हैं। इनके भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन 50 रुपये की दर से डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है।

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