वाशिंगटन में घटी एक चौंकाने वाली घटना ने एक बार फिर अमेरिका की राजनीति में हिंसा की गहरी जड़ों को उजागर कर दिया है। शनिवार रात लगभग आठ बजकर छत्तीस मिनट पर व्हाइट हाउस संवाददाताओं के वार्षिक रात्रिभोज के दौरान अचानक गोलियों की आवाज ने माहौल को दहला दिया। यह कार्यक्रम वाशिंगटन हिल्टन होटल में आयोजित हो रहा था, जहां देश की राजनीति, मीडिया और मनोरंजन जगत के प्रमुख लोग एकत्रित थे। इस अप्रत्याशित हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने न केवल उस शाम को अफरातफरी में बदल दिया, बल्कि अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में हिंसा की पुरानी यादों को भी ताजा कर दिया।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ट्रंप पहले ही पिछले दो वर्षों में तीन हमलों का सामना कर चुके हैं। यह हालिया प्रयास एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि अमेरिका में राजनीतिक तनाव किस हद तक बढ़ चुका है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमलावर कोल एलन नामक एक 31 वर्षीय व्यक्ति था, जिसे मुख्य सभागार तक पहुंचने से पहले ही काबू कर लिया गया। राष्ट्रपति को इस घटना में कोई चोट नहीं आई, लेकिन इसने देश भर में चिंता की लहर पैदा कर दी है।

हम आपको याद दिला दें कि इससे पहले जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर नामक छोटे शहर में चुनावी रैली के दौरान ट्रंप पर गोलीबारी हुई थी। एक हमलावर ने पास की इमारत की छत से आठ गोलियां चलाई थीं। इस हमले में ट्रंप के कान को हल्की चोट लगी थी, जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद सितंबर में फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के गोल्फ क्लब के पास भी एक संदिग्ध व्यक्ति को हथियार के साथ पकड़ा गया था, जिसे हत्या की साजिश के रूप में देखा गया। उसी वर्ष अक्टूबर में कैलिफोर्निया में एक और संदिग्ध को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसने ट्रंप की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया था।

 

वैसे अमेरिका का इतिहास राष्ट्रपति स्तर पर राजनीतिक हिंसा से अछूता नहीं रहा है। 1865 में अब्राहम लिंकन की हत्या से लेकर 1963 में जॉन एफ केनेडी की हत्या तक कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने देश की लोकतांत्रिक नींव को झकझोर दिया। लिंकन और केनेडी के अलावा जेम्स गारफील्ड और विलियम मैकिनले भी ऐसे राष्ट्रपति रहे जिन्हें पद पर रहते हुए गोली मार दी गई थी। इसके अलावा कई ऐसे नेता भी रहे जिन्होंने हमलों से बचकर अपनी जान बचाई। थियोडोर रूजवेल्ट पर 1912 में एक व्यक्ति ने गोली चलाई थी, लेकिन वह बच गए थे। इसी तरह 1981 में रोनाल्ड रीगन पर वाशिंगटन में एक हमलावर ने गोली चलाई थी। रीगन को गंभीर चोटें आईं, लेकिन त्वरित चिकित्सा सहायता से उनकी जान बच गई। इस घटना ने उनकी लोकप्रियता को भी बढ़ा दिया और उनके राजनीतिक कॅरियर को मजबूती मिली थी।

 

इतिहासकार मानते हैं कि रीगन पर हमला अमेरिका के एक अशांत दौर का अंत था, जिसमें रॉबर्ट केनेडी और मार्टिन लूथर किंग जैसे नेताओं की हत्या शामिल थी। इसके बाद भी राजनीतिक हिंसा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। हाल के वर्षों में यह प्रवृत्ति फिर से उभरती दिखाई दे रही है। 2021 में कैपिटल भवन पर हमला, उग्रवादी सशस्त्र समूहों का बढ़ता प्रभाव और विभिन्न राजनीतिक हस्तियों पर हमले इस बढ़ती अस्थिरता के संकेत हैं। 2017 में एक व्यक्ति ने रिपब्लिकन सांसदों पर गोली चलाई थी जिसमें कई लोग घायल हुए। 2022 में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश की हत्या की साजिश का खुलासा हुआ, जबकि एक अन्य हमलावर ने विस्कॉन्सिन में एक न्यायाधीश की हत्या कर दी और कई अन्य नेताओं को निशाना बनाने की योजना बनाई थी।

 

इसी प्रकार मिशिगन की गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर के अपहरण की साजिश और सैन फ्रांसिस्को में नैन्सी पेलोसी के पति पर हमला भी इस हिंसक माहौल को दर्शाते हैं। हाल ही में यूटा में एक राजनीतिक नेता चार्ली किर्क की हत्या ने इस प्रवृत्ति को और गंभीर बना दिया है। इन सभी घटनाओं को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका एक बार फिर राजनीतिक हिंसा के खतरनाक दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप पर लगातार हमले इस बात का संकेत हैं कि देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण और असंतोष चरम पर है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा और क्या इस हिंसक प्रवृत्ति को रोका जा सकेगा। बहरहाल, अमेरिका की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजनीतिक अस्थिरता और गहरा सकती है।

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