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लखनऊ, 23 मार्च । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में सोमवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुनियादी ढांचे, हेरिटेज संरक्षण और यातायात व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है।

कैबिनेट बैठक में राजधानी लखनऊ में नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर की पुनरीक्षित लागत को स्वीकृति प्रदान की गई है। वृन्दावन योजना, सेक्टर-15 में प्रस्तावित इस कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के लिए पहले 1297.42 करोड़ रुपये की लागत को स्वीकृत किया था लेकिन निविदा प्रक्रिया के दौरान लागत अधिक आने के कारण इसे संशोधित कर 1435.25 करोड़ रुपये को मंजूर दी गई है। इस लागत में जीएसटी, लेवी, कंटीजेंसी और सुपरविजन चार्ज सहित अन्य खर्च भी शामिल हैं। ईपीसी मोड पर बनने वाले इस अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर में 10 हजार लोगों की क्षमता वाला सभागार और 2,500 लोगों की क्षमता का ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। साथ ही बड़े स्तर पर पार्किंग की सुविधा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप भीड़ नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा।

इसी क्रम में योगी सरकार ने लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को ‘एडाप्टिव रि-यूज’ के तहत सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है। इसके लिए इन भवनों से संबंधित भूमि का स्वामित्व पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने का प्रस्ताव किया गया है। इन ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज पर्यटन इकाइयों के रूप में विकसित कर राज्य में पर्यटन को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह भूमि हस्तांतरण अपवादस्वरूप किया जा रहा है और इसे भविष्य के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा।

साथ ही लखनऊ की यातायात समस्या के समाधान के लिए भी एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस क्रम में लखनऊ-हरदोई मार्ग पर स्थित दुबग्गा चौराहे पर 1,811.72 मीटर लंबा तीन लेन का फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 305.31 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। दुबग्गा चौराहा लखनऊ शहर का एक प्रमुख यातायात केंद्र है, फ्लाईओवर के निर्माण से इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि ये सभी परियोजनाएं लखनऊ को आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यटन के दृष्टिकोण से आकर्षक शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

गोरखपुर बनेगा सोलर सिटी, चिलुआताल में 20 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्लांट को मिली मंजूरी

कैबिनेट बैठक में गोरखपुर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। इसके तहत चिलुआताल में 20 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिससे हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मानकों के अनुसार सोलर सिटी के रूप में विकसित शहरों में पांच वर्षों के भीतर पारंपरिक ऊर्जा की कुल मांग में कम से कम 10 फीसदी की कमी लाना अनिवार्य है। गोरखपुर के लिए यह लक्ष्य लगभग 121.8 मिलियन यूनिट ऊर्जा अक्षय स्रोतों से प्राप्त करना निर्धारित किया गया है।

गोरखपुर के तहसील सदर स्थित चिलुआताल में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए करीब 80 एकड़ जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। यह क्षेत्र पर्यटन विभाग, राजस्व विभाग तथा हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के स्वामित्व के अधीन है। परियोजना के लिए पर्यटन विभाग की 11.4181 हेक्टेयर (28.20 एकड़) भूमि कोल इंडिया लिमिटेड को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी इस 20 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लांट की स्थापना अपने संसाधनों से करेगी। चिन्हित भूमि ताल श्रेणी की है और धारा-77(1) के अंतर्गत सुरक्षित श्रेणी में आती है। इस पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने से भूमि की मूल प्रकृति में कोई परिवर्तन नहीं होगा, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा। इस परियोजना से प्रति वर्ष न्यूनतम 33.29 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिसे विद्युत ग्रिड में जोड़ा जाएगा।

औरैया और खुर्जा में संचालित हो रहा फ्लोटिंग सोलर प्लांट

ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने बताया कि प्रदेश में पहले से ही औरैया में 20 मेगावाट तथा खुर्जा में 11 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। गोरखपुर में प्रस्तावित यह प्लांट कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा अपने संसाधनों से स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जल सतह पर आधारित होगी और इसके लिए लगभग 80 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है।

पछवारा साउथ कोल ब्लॉक विकास को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में नेयवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (एनयूपीपीएल) को आवंटित पछवारा साउथ कोल ब्लॉक के विकास हेतु 2242.90 करोड़ की आकलित लागत को मंजूरी प्रदान की गई। यह कंपनी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड एवं एनएलसी इंडिया लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है। परियोजना का वित्तपोषण 70 फीसदी ऋण (1570.03 करोड़) एवं 30 फीसदी अंशपूंजी के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें उत्पादन निगम की 49 फीसदी हिस्सेदारी के अनुसार 329.71 करोड़ अंशपूंजी देय होगी। इस कोल ब्लॉक से प्राप्त कोयला मुख्य रूप से कानपुर नगर स्थित 3×660 मेगावाट घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना की इकाइयों में उपयोग किया जाएगा। ब्लॉक में खनन कार्य 19 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हो चुका है और अगस्त 2026 से कोयला निकासी का लक्ष्य रखा गया है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि इस कोल ब्लॉक के विकसित होने से घाटमपुर प्लांट में बिजली उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 80 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली सस्ती होगी, जबकि कुल मिलाकर करीब एक रुपये प्रति यूनिट तक कमी आने की संभावना है। इससे प्रदेश को सस्ती, सुलभ और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।

By editor

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