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देहरादून, 19 जुलाई (हि. स.) उत्तराखंड ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चमोली जिले के तपोवन में जियोथर्मल (भू-तापीय) ऊर्जा परियोजना के वैज्ञानिक अन्वेषण कार्य की शुरुआत कर दी है। परियोजना के लिए विश्व की अग्रणी आइसलैंड की जियोथर्मल विशेषज्ञ संस्था वर्किस कंसल्टिंग इंजीनियर्स की भारतीय सहयोगी फर्म को यूजेवीएन लिमिटेड ने परामर्शदाता नियुक्त किया है।

ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग की ओर से रविवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम् ने बताया कि परामर्शदाता प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके आधार पर ड्रिलिंग, भू-वैज्ञानिक परीक्षण तथा अन्य तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में भू-तापीय ऊर्जा नीति लागू की थी और जून 2026 में तपोवन परियोजना का अन्वेषण कार्य यूजेवीएन लिमिटेड को सौंपा गया।

यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि अब तक के अध्ययन में तपोवन क्षेत्र एक मेगावाट की पायलट परियोजना तथा 10 मेगावाट की वाणिज्यिक जियोथर्मल विद्युत परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यूजेवीएनएल ने उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का भी गठन किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल पर यूजेवीएन लिमिटेड और ऊर्जा विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि तपोवन जियोथर्मल परियोजना राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण शुरुआत है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, ऊर्जा के नए स्रोत विकसित होंगे तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाई जा रही यह परियोजना प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ उत्तराखंड को भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

By editor

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