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हरिद्वार, 11 अप्रैल । जिला सहकारी मत्स्य विकास एवं विपणन फेडरेशन लिमिटेड, हरिद्वार के तत्वाधान में रुड़की क्षेत्र के थीथकी कवायदपुर स्थित मत्स्य पालन ग्रोथ सेंटर में एक विशेष भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नेपाल से आए 40 किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने कोऑपरेटिव फिश सोसाइटी के तालाबों का अवलोकन किया व आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मत्स्य विशेषज्ञ नेपाल सिंह कश्यप ने किसानों को मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में सहकारिता मॉडल के माध्यम से 40 से अधिक मत्स्य सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है, जो हरिद्वार, उधम सिंह नगर और देहरादून सहित कई जनपदों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से हजारों लोगों को मत्स्य व्यवसाय से रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

नेपाल से आए किसानों को रोहू, कतला, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, पंगासियस और ट्राउट मछलियों के पालन की विस्तृत जानकारी दी गई। नेपाल सिंह ने बताया कि पहले जहां उत्पादन 35 कुंतल प्रति हेक्टेयर था, वहीं अब यह बढ़कर 8 से 65 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। विशेष रूप से ट्राउट मछली का उत्पादन 18 डिग्री तापमान वाले क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिसका बाजार मूल्य 800 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल रहा है।

उन्होंने सहकारिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 11-11 सदस्यों की समितियां बनाकर हजारों समूहों के माध्यम से सहकारिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मत्स्य मंत्रालय की स्थापना तथा राज्य सरकार द्वारा मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दिए जाने से इस क्षेत्र को नई दिशा मिली है।

इस अवसर पर बीएचयू के प्रोफेसर गुरु प्रकाश, नेपाल से आए किसान बुद्धिराज गौतम, दुर्गा बहादुर, लक्ष्मण हितान, ग्राम प्रधान कुलदीप सिंह, मत्स्य विभाग की निरीक्षक प्रियंका रासो, कृषि विभाग से बीएसए मोहम्मद ताहिर और अनिल मलिक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। किसान आयोग के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) चौधरी अजीत सिंह ने नेपाल से आए किसानों का स्वागत किया।

मत्स्य विभाग की वरिष्ठ निरीक्षक प्रियंका रासो ने बताया कि वर्ष 2026 में मत्स्य पालन योजनाओं पर दी जाने वाली सब्सिडी को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है और बड़ी संख्या में किसान इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

By editor

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