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देहरादून, 07 अगस्त । वन उपज के अवैध भंडारण और व्यापार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वन विभाग ने आज हरिद्वार और ऋषिकेश स्थित पंजीकृत लीसा इकाइयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान हरिद्वार स्थित एक लीसा डिपो में अभिलेख उपलब्ध नहीं होने पर उसे अग्रिम आदेशों तक सीज कर दिया गया,जबकि ऋषिकेश की एक इकाई में जांच के दौरान कोई अनियमितता नहीं मिली।

वन विभाग के अनुसार मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल और वन संरक्षक शिवालिक के निर्देश पर देहरादून और हरिद्वार वन प्रभाग की संयुक्त टीमों ने यह अभियान चलाया। कार्रवाई उत्तर प्रदेश लीसा और अन्य वन उपज (विनियमन) अधिनियम,1976 के तहत की गई।

उप प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून डॉ.उदय नंद गौड़ के नेतृत्व में गठित 22 सदस्यीय टीम ने भगवानपुर, हरिद्वार स्थित एक पंजीकृत लीसा डिपो का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परिसर में विरोजा और तारपीन तेल से भरे ड्रम मिले, लेकिन स्टॉक रजिस्टर,क्रय-विक्रय अभिलेख, परिवहन प्रपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। अभिलेखों के अभाव में सामग्री का सत्यापन नहीं हो पाने पर वन विभाग ने इकाई को सीज कर अग्रिम जांच शुरू कर दी है।

वहीं, दूसरी टीम ने उप प्रभागीय वनाधिकारी रुड़की ज्वाला प्रसाद के नेतृत्व में लालतप्पड़, ऋषिकेश स्थित जय भारत रोजिन एंड केमिकल्स प्रोडक्ट्स का निरीक्षण किया। यहां उपलब्ध वन उपज और अभिलेखों की जांच की गई,जिसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई।

प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून नीरज शर्मा और हरिद्वार के प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध ने कहा कि वन उपज के भंडारण,परिवहन और व्यापार से जुड़े सभी प्रतिष्ठानों को नियमानुसार अभिलेख रखना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन,अवैध भंडारण या व्यापार पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग ने कहा कि वन उपज के अवैध कारोबार पर रोक लगाने और वैध व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ऐसे आकस्मिक निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

By editor

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