कोरबा/देहरादून, 16 सितंबर । कोयले से बिजली पैदा करने वाले संयंत्र की पहचान अक्सर धुआं, राख और भारी औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा में एनटीपीसी परिसर का भ्रमण करने पहुंचे उत्तराखंड के पत्रकारों ने ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण और राख के पुन: उपयोग की कोशिशों की अलग तस्वीर देखी। चारपारा ऐश डाइक के पुनर्वासित क्षेत्र में लगाए गए 4.5 लाख से अधिक पौधे इस पहल का एक उदाहरण हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर के तीसरे दिन बुधवार को मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी कोरबा और भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को) का भ्रमण किया। पत्रकारों ने ऊर्जा उत्पादन से लेकर औद्योगिक सुरक्षा, तकनीकी दक्षता, राख प्रबंधन और पर्यावरणीय गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से समझा।
एनटीपीसी कोरबा में संवाद कार्यक्रम के दौरान कार्यकारी निदेशक केसी पात्रा ने बताया कि एनटीपीसी की वर्तमान कुल विद्युत उत्पादन क्षमता करीब 91 गीगावाट है। कंपनी की योजना वर्ष 2037 तक इसे 150 गीगावाट और वर्ष 2047 तक 240 गीगावाट करने की है। उन्होंने कहा कि क्षमता विस्तार के साथ तकनीक, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कोरबा संयंत्र की दक्षता के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। 2,600 मेगावाट क्षमता वाले संयंत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 87.71 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर दर्ज किया। यह एनटीपीसी के सभी स्टेशनों में लगातार छठे वर्ष सर्वाधिक रहा। इसी अवधि में संयंत्र ने 94.85 प्रतिशत घोषित क्षमता और 95.33 प्रतिशत ऑन-बार उपलब्धता दर्ज की।
संयंत्र की इकाइयों के लगातार संचालन ने भी अपनी जगह बनाई है। अधिकारियों के अनुसार, यूनिट-7 ने 455 दिन और यूनिट-1 ने 495 दिन लगातार संचालन किया। कोरबा स्टेज-1 की तीनों इकाइयां एनटीपीसी की लंबे समय तक लगातार संचालित इकाइयों में शामिल हैं।
कोयले से बिजली उत्पादन के बाद निकलने वाली राख का उपयोग और उसका प्रबंधन भ्रमण का एक अहम हिस्सा रहा। अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोरबा ने 60.71 लाख मीट्रिक टन राख का उपयोग किया। चारपारा ऐश डाइक के पुनर्वासित क्षेत्र में 4.5 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। यह क्षेत्र अब हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है।
यात्रा के दौरान पत्रकारों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में ऊर्जा परियोजनाओं के साथ पर्यावरणीय और सुरक्षा पहलुओं को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है। पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंदरियाल ने कहा कि मीडिया एक्सपोजर टूर का उद्देश्य पत्रकारों को विकास परियोजनाओं की जमीनी गतिविधियों से सीधे रूबरू कराना है।
एनटीपीसी के बाद मीडिया दल ने बाल्को का भी भ्रमण किया। यहां पत्रकारों ने एल्युमिनियम उत्पादन की प्रक्रिया, आधुनिक तकनीक, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरणीय प्रबंधन को समझा। अधिकारियों के साथ उत्पादन, तकनीकी नवाचार, श्रमिक सुरक्षा और स्थानीय विकास से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ।
इससे पहले बिलासपुर स्थित एसईसीएल मुख्यालय में संवाद कार्यक्रम हुआ। निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने कंपनी की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में निदेशक (तकनीकी-संचालन) रमेश चंद्र महापात्र तथा निदेशक (तकनीकी-योजना एवं परियोजना) नृपेंद्र नाथ भी मौजूद रहे।
ऊर्जा उत्पादन से लेकर राख के पुन: उपयोग और हरित क्षेत्र के विकास तक एनटीपीसी कोरबा का भ्रमण मीडिया प्रतिनिधियों के लिए औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण प्रबंधन को समझने का प्रत्यक्ष अवसर रहा।
