tarun-chug-takes-aap-on-1984-r

भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (आआपा) सरकार पर वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों से वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आआपा सरकार का असली चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो गया है।

चुग ने बुधवार को एक बयान में कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के नाम पर राजनीतिक ड्रामा करने वाली आआपा ने अपने ही घोषणापत्र में पीड़ित परिवारों से किए वादे पूरे नहीं किए, वहीं ईडी जांच में सामने आए गंभीर आरोपों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। दूसरी ओर, लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए के भुगतान से भी भगवंत मान सरकार भाग रही है।

चुग ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान को 1984 के नाम पर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन करने से पहले अपने 2017 के घोषणापत्र का जवाब देना चाहिए। आआपा ने 1984 के दंगा पीड़ित परिवारों को लाख रुपये, सस्ते घर और सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। आज सत्ता में आए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार अपने हक के लिए भटक रहे हैं। जिस पार्टी ने वोट लेने के लिए उनके दर्द को अपने घोषणापत्र में जगह दी, वही सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल गई। यही नहीं, जब पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलने पहुंचे तो उन्हें सहानुभूति के बजाय पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार ने 1984 के पीड़ितों को केवल आश्वासन नहीं दिया, बल्कि 30 साल बाद धूल खा रही फाइलों को कोर्ट तक पहुंचाया, एसआईटी का गठन किया, बंद पड़े मामलों को दोबारा खुलवाया और न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। दोषियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाया गया। पीड़ित परिवारों को वह आर्थिक सहायता दी गई जो उन्हें दशकों पहले मिल जानी चाहिए थी और रोजगार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई। सरकार के अनुसार 3,465 नौकरियां पीड़ित परिवारों को दी गईं। इनमें दिल्ली सरकार द्वारा 36, केंद्र सरकार द्वारा 338 और हरियाणा सरकार द्वारा 121 नियुक्तियां शामिल हैं। यही अंतर है भाजपा की न्याय और पुनर्वास की राजनीति और आआपा के खोखले वादों के बीच।

चुग ने कहा कि ईडी की जांच ने आआपा के तथाकथित ‘कट्टर ईमानदारी’ के दावे की भी पोल खोल दी है। ईडी के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के माध्यम से तबादलों और पोस्टिंग, सरकारी फाइलों और प्रशासनिक फैसलों में कथित प्रभाव का नेटवर्क चलाए जाने से संबंधित सामग्री सामने आई है। जांच के दौरान नितिन गोहल के परिसर से 20.98 लाख रुपये की अघोषित नकदी जब्त किए जाने तथा वॉट्सएप चैट और कथित सरकारी दस्तावेजों से जुड़ी सामग्री का भी उल्लेख किया गया है। ये आरोप बेहद गंभीर हैं और मुख्यमंत्री भगवंत मान को अब चुप्पी तोड़कर पंजाब की जनता को जवाब देना चाहिए।

ई डी द्वारा जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बावजूद पंजाब पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय अतिरिक्त रिकॉर्ड और मूल डेटा मांगती रही। ईडी ने 31 अगस्त के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। 24 जुलाई को डीजीपी को एफआईआर के संबंध में पत्र भेजा गया था और तीन सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई से पहले कार्रवाई की मांग भी की गई। भाजपा की मांग है कि पंजाब पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में काम न करे और मामले की निष्पक्ष जांच कराए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े किसी भी व्यक्ति सहित हर दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आआपा सरकार के पास राजनीतिक प्रचार और विज्ञापनों के लिए पैसा है, लेकिन अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का वैध डीए देने के लिए नहीं। कर्मचारियों के आंदोलन का समाधान निकालने के बजाय सरकार उन्हें नोटिस दे रही है और अब अदालतों में मामला खींच रही है। भाजपा की मांग है कि भगवंत मान सरकार डीए और एरियर के भुगतान के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध रोडमैप जारी करे। पंजाब के कर्मचारी सरकार से कोई खैरात नहीं मांग रहे, वे अपना मेहनत से अर्जित और वैध हक मांग रहे हैं।

————

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights