गांधी पॉलिटेक्निक में यज्ञ, पुष्पांजलि और श्रद्धांजलि सभा; वक्ताओं ने कहा, स्वामी कल्याण देव का जीवन समाज के लिए अमूल्य प्रेरणा

मुजफ्फरनगर। शिक्षा, सेवा और समाज सुधार की अमिट मिसाल रहे पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव महाराज की 22वीं पुण्यतिथि पर गांधी पॉलिटेक्निक, भोपा रोड परिसर श्रद्धा और भावनाओं से सराबोर हो उठा। उनकी तपोस्थली में यज्ञ, पुष्पांजलि और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां उपस्थित लोगों ने नम आंखों से महान संत को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
स्वामी कल्याण देव की प्रतिमा के समक्ष वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ सम्पन्न हुआ। इसके बाद आंदोलनकारी मास्टर विजय सिंह, प्रधानाचार्य चमन लाल, राजपूत महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र पुंडीर सहित सभी उपस्थित लोगों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और भावनात्मक श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मास्टर विजय सिंह ने कहा कि स्वामी कल्याण देव केवल एक संत नहीं, बल्कि युगदृष्टा और महान समाज सुधारक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और समाज सेवा को समर्पित कर दिया। बेहद साधारण जीवन जीने वाले स्वामी जी के पास न धन था, न वैभव, लेकिन उनके पास समाज को बदलने का अद्भुत संकल्प था। उन्होंने लगभग 300 शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों के लिए शिक्षा के द्वार खोले। उनका विश्वास था कि शिक्षा ही देश और समाज के विकास की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि आज जब अनेक शिक्षण संस्थान शिक्षा को व्यवसाय बना चुके हैं, तब स्वामी कल्याण देव की संस्थाएं आज भी सेवा और संस्कार की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। उनके उत्तराधिकारी स्वामी ओमानंद महाराज ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संस्थानों को व्यवसाय नहीं बनने दिया और सरकारी मानकों के अनुरूप फीस व्यवस्था कायम रखकर समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित की है।
राजेंद्र पुंडीर ने कहा कि स्वामी कल्याण देव के अधूरे सपनों को स्वामी ओमानंद महाराज ने आगे बढ़ाया और 22 नए शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर गुरु-शिष्य परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वहीं सतीश शर्मा ने कहा कि राष्ट्र और समाज को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक परिवार को संस्कारवान पीढ़ी तैयार करनी चाहिए। प्रधानाचार्य चमन लाल ने कहा कि स्वामी कल्याण देव ने केवल शिक्षा का दीप ही नहीं जलाया, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार देकर उनके जीवन में आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रकाश भी फैलाया।


श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्वामी कल्याण देव का संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा, तपस्या और मानव कल्याण की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेगी। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व समाज के लिए सदैव प्रकाश स्तंभ बना रहेगा।

कार्यक्रम में चमन लाल, राजेंद्र पुंडीर, डॉ. सुभाष शर्मा, मनोज सिखेड़ा, अनुज कुमार, डॉ. नरेंद्र पाठक, बबीता रानी, डॉ. अभिषेक चौधरी, नीरज कुमार, आर.के. मेधा, मनोज कुमार, अवधेश कुमार, राजेंद्र शर्मा, राजेंद्र सैनी, बसंत गोयल, कृष कौशिक, मनोज कुमार गर्ग सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर स्वामी कल्याण देव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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