95वीं जयंती पर यज्ञ, माल्यार्पण एवं विचार गोष्ठी का आयोजन, वक्ताओं ने बताया ईमानदार और जननायक नेता
मुजफ्फरनगर। देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं सामाजिक न्याय के पुरोधा रहे स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) की 95वीं जयंती के अवसर पर वी.पी. सिंह विचार मंच के तत्वावधान में शहर के आर्य समाज मंदिर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में यज्ञ, पुष्पांजलि तथा विचार गोष्ठी के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ से हुआ, जिसके पश्चात उपस्थित गणमान्य लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके राजनीतिक जीवन, ईमानदारी, सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण तथा राष्ट्रहित में किए गए ऐतिहासिक कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजपूत महासभा मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष ठाकुर राजेंद्र सिंह पुंडीर ने की। उन्होंने कहा कि आज के राजनीतिक परिवेश में नेताओं को वी.पी. सिंह से प्रेरणा लेकर गरीबों, वंचितों, पिछड़ों और दलित वर्ग के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास पहुंचाना होना चाहिए, जिसकी मिसाल वी.पी. सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में प्रस्तुत की। इस दौरान आंदोलनकारी मास्टर विजय सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह सामाजिक न्याय के प्रखर प्रहरी थे। उन्होंने देश में सामाजिक समानता और पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार दिलाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए। मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर उन्होंने पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया, जो सामाजिक न्याय की दिशा में एक क्रांतिकारी निर्णय था। वक्ताओं ने कहा कि वी.पी. सिंह ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, केंद्रीय रक्षा मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए सदैव ईमानदारी और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई देशभर में मिसाल बनी रही। सत्ता के सर्वोच्च पदों पर रहने के बावजूद उन पर कभी भी भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा, जो उनकी स्वच्छ छवि और नैतिक मूल्यों का प्रमाण है।
गोष्ठी में वक्ताओं ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कठोर कदम उठाए तथा अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश में सुशासन स्थापित करने का प्रयास किया। उनके नेतृत्व में शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को विशेष महत्व मिला। उन्होंने कहा कि वी.पी. सिंह केवल एक राजनेता ही नहीं बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और अपनी काफी भूमि गरीबों को दान देकर समाज सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन त्याग, सेवा और सामाजिक समरसता की भावना से ओत-प्रोत था। कहा कि वर्तमान समय में जब राजनीति में नैतिक मूल्यों और जनसेवा की भावना पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, तब वी.पी. सिंह जैसे नेताओं के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सिद्ध किया कि ईमानदारी, सामाजिक न्याय और जनहित की राजनीति ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।
कार्यक्रम में सुकरामपाल कश्यप (अध्यक्ष मजदूर किसान यूनियन पार्टी), जल सिंह फौजी, सुरेंद्र शर्मा, दिनेश कुमार, रामपाल, श्याम सिंह, हरिओम सहित अनेक गणमान्य नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
