नई दिल्ली, 08 मई । दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने शुक्रवार को सड़क प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। यह दिल्ली में फैले हुए वायु प्रदूषण स्रोतों की जमीनी निगरानी और तेज समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कार्यक्रम के तहत हर जिले में विशेष फील्ड सर्वेयर तैनात किए गए हैं, जो हर कार्य दिवस पर निगरानी अधिकारियों की देखरेख में दिल्ली की सड़कों का व्यवस्थित सर्वे करेंगे और रियल-टाइम में प्रदूषण हॉट स्पॉट की पहचान करेंगे।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दिल्ली की स्वच्छ हवा की लड़ाई जमीन पर, गली-गली और सड़क पर जीतनी होगी। रोड राडार के माध्यम से सरकार रोजाना निगरानी, रियल-टाइम रिपोर्टिंग और सीधे विभागीय जवाबदेही की वैज्ञानिक व्यवस्था लागू कर रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में दिल्ली सरकार स्वच्छ हवा के बड़े मिशन पर काम कर रही है। इसमें वैज्ञानिक तरीकों, मज़बूत मॉनिटरिंग, तेज रिस्पॉन्स सिस्टम और जमीनी स्तर पर प्रभावी अनुपालन शामिल है। यह प्रोग्राम उसी व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर जिले के 13 सर्वेयर मिलकर दिल्ली की लगभग 18,000 किमी सड़कों को कवर करेंगे। इसमें एमसीडी, नई दिल्ली नगर परिषद, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के सभी क्षेत्र शामिल होंगे। हर महीने दिल्ली के पूरे सड़क नेटवर्क का सर्वे किया जाएगा। प्रत्येक सर्वेयर को रोजाना कम से कम 20 किमी सड़क का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि एमसीडी -311 मोबाइल ऐप के माध्यम से हर सर्वेयर जियो-टैग्ड फील्ड सर्वे करेगा और रोजाना कम से कम 70 फोटो आधारित प्रदूषण संबंधी शिकायतें दर्ज करेगा। इस प्रकार पूरे शहर में प्रतिदिन लगभग 1,000 मुद्दों की पहचान होगी, जिससे संबंधित विभागों को लगातार जमीनी जानकारी मिलती रहेगी। सिस्टम में ऐसी व्यवस्था भी की गई है जिससे एक ही समस्या की दोबारा शिकायत दर्ज न हो और हर शिकायत एक अलग एवं कार्रवाई योग्य प्रदूषण स्रोत से जुड़ी हो।
यह प्रोग्राम वायु प्रदूषण से जुड़े 11 प्रकार के कारणों की निगरानी करेगा। इनमें कच्ची सड़कें, टूटे फुटपाथ, डिवाइडर और गड्ढों से उड़ने वाली धूल, सड़क किनारे रेत या निर्माण सामग्री, बिना पक्के और अव्यवस्थित पार्किंग स्थल, कचरा एवं ओवरफ्लो होते ढलाव, सड़क किनारे बायोमास और कचरा जलाना, प्लास्टिक जलाना, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण का मलबा, हरियाली की आवश्यकता वाले सड़क किनारे क्षेत्र, सेंट्रल वर्ज पर हरियाली की कमी, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल तथा सर्वे के दौरान पहचाने गए अन्य प्रदूषण स्रोत शामिल हैं।
मंत्री सिरसा ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लगातार निगरानी, समय रहते पहचान और जवाबदेह प्रशासन ज़रूरी है। यह पहल सड़क की धूल, कचरा डंपिंग, खुले में जलाने और निर्माण धूल जैसे प्रदूषण स्रोतों पर तेज कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
“रोड पॉल्यूशन कंट्रोल” प्रोग्राम की शुरुआत के साथ दिल्ली सरकार और डीपीसीसी ने यह स्पष्ट किया है कि वे वैज्ञानिक निगरानी, तकनीकी साधनों और लगातार प्रवर्तन सहयोग के माध्यम से प्रदूषण के फैले हुए स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
