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नई दिल्ली, 13 अप्रैल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान देश के अदम्य साहस का प्रतीक है। साथ ही इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। इसमें समाज में परोपकारी शक्तियों को मजबूत करने और विभाजन व अन्याय फैलाने वाली ताकतों का विरोध करने का संदेश दिया गया।

प्रधानमंत्री ने विभिन्न भाषाओं में एक्स पर पोस्ट कर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग के वीरों का साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों के प्रति प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेशी शासन की बर्बरता के खिलाफ शहीदों का संघर्ष देश की हर पीढ़ी को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने सभी अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री ने सुभाषित साझा किया, इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम्। अपघ्नन्तो अराव्णः।। इस सुभाषित का अर्थ है कि हे परिश्रमी और कर्मठ लोगों

तुम उन श्रेष्ठ और परोपकारी शक्तियों को बढ़ाओ, जो पूरे विश्व को श्रेष्ठ, सभ्य और उन्नत बनाती हैं। और उन दुष्ट, विनाशकारी तथा शत्रुतापूर्ण शक्तियों का नाश करो, जो समाज में बुराई, अन्याय और अव्यवस्था फैलाती हैं।

उल्लेखनीय है कि 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर के आदेश पर सैनिकों ने बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। बाग का मुख्य प्रवेश द्वार संकरा था, जिससे लोग बाहर नहीं निकल सके और कई लोग गोलियों से बचने के लिए कुएं में कूद गए। इस भीषण गोलीकांड में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए।

By editor

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