कांग्रेस ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही ज्ञान के बल पर चुनाव जीत रहे हों लेकिन आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें नए ज्ञान की आवश्यकता है। संचार प्रभारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का नजरिया इतना नकारात्मक हो गया है कि मोदी सरकार के पेशेवर समर्थक भी अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई के अनुमान तेजी से बढ़ रहे हैं जबकि विकास के अनुमान काफी कम हो गए हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लगातार घट रहा है और आपूर्ति श्रृंखलाओं का इतना गंभीर कुप्रबंधन हुआ है कि प्रधानमंत्री ने अब उपभोक्ताओं से उपभोग कम करने का आग्रह किया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि इन चिंताओं में कुछ भी नया नहीं है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इन्हें कुछ समय से उठा रही है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण सुस्त निवेश माहौल से संबंधित है। प्रधानमंत्री द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को टॉफियां भेंट करने का जिक्र करते हुए रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री टॉफियां बांटने और जनता से धार्मिक अपील करने में व्यस्त हैं।
उन्होंने दावा किया कि देश के पैरों तले ज़मीन खिसक रही है। हमें आर्थिक नीति-निर्माण में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है, लेकिन मोदी सरकार के पास हमेशा की तरह आत्म-प्रशंसा के सिवा कोई नया विचार नहीं है। कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ज्ञानेश के माध्यम से चुनाव करा रहे हैं, लेकिन उन्हें अर्थव्यवस्था के लिए एक नए ज्ञान की तत्काल आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि निजी निवेश की दर में महत्वपूर्ण वृद्धि के बिना आर्थिक विकास को उच्च स्तर पर गति देना और उसे बनाए रखना संभव नहीं है, जबकि वास्तव में ऐसा होना ही चाहिए। निजी निवेश की यह दर इसलिए आगे नहीं बढ़ पाई है क्योंकि वास्तविक वेतन स्थिर बना हुआ है, जिससे सभी आय वर्गों में उपभोग की वृद्धि बाधित हो रही है। उपभोक्ता मांग के अभाव में, भारतीय कंपनियों के पास निवेश करने का कोई प्रोत्साहन नहीं है।
