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नई दिल्ली, 27 मार्च । दिल्ली विधानसभा सदन में आज नियम 77(1)(ए) के तहत एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। यह पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिड़ला के लिए चेतावनी प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव सदन की अवमानना सिद्ध होने और विधानसभा परिसर के भीतर एक काल्पनिक ‘फांसी घर’ की “मनगढ़ंत और आधारहीन कहानी” प्रचारित करने के खिलाफ लाया गया था।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि हालांकि सदन के पास कारावास जैसी कठोर सजा देने का भी अधिकार है, लेकिन विधायिका की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए सदन ने न्यायिक संयम का परिचय देते हुए दंड के प्रथम चरण के रूप में यह औपचारिक चेतावनी जारी करने का निर्णय लिया है।

स्थिति की गंभीरता पर सदन को संबोधित करते हुए विजेन्द्र गुप्ता ने विधानसभा परिसर के भीतर ‘फांसी घर’ के “मनगढ़ंत नैरेटिव” पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गौरवशाली भवन को फांसी घर से जोड़ना इसके वास्तविक इतिहास के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा, “सदन इस मामले पर अत्यंत न्यायसंगत तरीके से विचार कर रहा है। अवमानना सिद्ध हो चुकी है। विशेषाधिकार के मामलों में भारत की कोई भी अदालत राहत नहीं दे सकती, फिर भी हम इस संस्थान की मर्यादा के अनुरूप ही कार्रवाई कर रहे हैं।

विजेंद्र गुप्ता ने सदस्यों को स्मरण कराया कि यह सदन केवल एक भवन नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक पवित्र मंदिर है। उन्होंने कई ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह देश का एकमात्र ऐसा सदन है जहां गांधी जी स्वयं कार्यवाही देखने आए थे। अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ (पृष्ठ 396) में उन्होंने मार्च 1919 में यहां हुए ‘रौलट बिल’ के विवाद का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि रौलट एक्ट 18 मार्च, 1919 को इसी सदन में पारित हुआ था। यहां की कार्यवाही देखने के बाद ही गांधी जी ने असहयोग आंदोलन का आह्वान किया था।

अध्यक्ष ने बताया कि 30 मार्च, 1919 को चांदनी चौक में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुई बर्बर फायरिंग, जिसे गांधी जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की पूर्व सूचना बताया था, इसी सदन के भीतर लिए गए निर्णयों का प्रत्यक्ष परिणाम थी।

अध्यक्ष ने ‘फांसी घर’ की झूठी कहानियां फैलाकर दिल्ली के वास्तविक ग्रामीण शहीदों की उपेक्षा करने पर पिछली सरकार की आलोचना की। उन्होंने 1918 में इसी सदन में आयोजित ‘वार कॉन्फ्रेंस’ के ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत किए, जहां प्रथम विश्व युद्ध के लिए 13 लाख भारतीयों की भर्ती का निर्णय हुआ था। उन्होंने बवाना, कंझावला, अलीपुर, बादली, नजफगढ़ और महरौली जैसे गांवों के उन स्मारकों के रिकॉर्ड साझा किए, जो आज भी उन सैकड़ों ग्रामीण युवाओं की शहादत की गवाही देते हैं जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विशेषाधिकार समिति की तीसरी रिपोर्ट विशेष रूप से “फांसी घर के संबंध में फैलाए गए झूठ” पर आधारित होगी। उन्होंने दोहराया कि विधानसभा सचिवालय और विशेषाधिकार समिति यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी भ्रामक जानकारी या अधिकारियों की अवहेलना से सदन की शुचिता और गरिमा से कोई समझौता न हो।

By editor

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