नीरज प्रजापति

सुधा त्यागी ने प्रेस वार्ता में खोली आरोपों की परतें, बोलीं कि ससुर की विरासत के नाम पर मुझे ही घर से बेघर कर दिया गया

मुजफ्फरनगर । पति और इकलौते बेटे को खोने के बाद एक महिला के सामने शुरू हुई कथित संपत्ति की लड़ाई अब सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई है। शुक्रवार को छपार निवासी सुधा त्यागी ने अपने परिवार एवं रिश्तेदारों के साथ मिलकर मीडिया सेंटर पर प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान पीड़ित सुधा ने अपनी जिंदगी में बीते वर्षों की पीड़ा और पारिवारिक विवाद की पूरी कहानी पत्रकारों के सामने रखी। सुधा ने अपनी सास हुक्मावती पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पति की मृत्यु के बाद उन्हें कथित रूप से घर से निकाल दिया गया और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराए गए।
सुधा त्यागी ने बताया कि उनके ससुर स्वामी श्रद्धानंद त्यागी स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके पति शिव कुमार का वर्ष 2009 में निधन हो गया, जबकि इकलौते पुत्र आशुतोष त्यागी की भी वर्ष 2017 में मृत्यु हो गई। उनका कहना था कि इन दोनों दुखद घटनाओं के बाद वह परिवार में लगभग अकेली पड़ गईं और इसी दौरान संपत्ति को लेकर विवाद और कथित उत्पीड़न का सिलसिला शुरू हुआ।

जिस घर को अपना समझा, वहीं से बेघर होने का दर्द मिला

सुधा ने आरोप लगाया कि उनकी सास ने कथित तौर पर धमकी और दबाव के बीच उनसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए और बाद में उन्हें घर से बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि पति और बेटे को खोने के बाद उन्हें सहारे की जरूरत थी, लेकिन इसके विपरीत वह अपने ही घर और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हो गईं। प्रेस वार्ता में सुधा ने अपनी सास के पहले पति से हुए पुत्र जुगमेंद्र को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि जुमेंद्र ने कथित रूप से उनके ससुर स्वामी श्रद्धानंद त्यागी का नाम अपने पिता के रूप में दर्ज कराया। आरोप है कि इस संबंध में छपार थाने में मुकदमा दर्ज भी कराया गया है। आरोप है कि मामले में विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई चल रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

संपत्ति पर कब्जे और धमकियों के भी लगाए आरोप

सुधा का आरोप है कि उनके हिस्से की जमीन और मकान पर भी जबरन कब्जा करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि परिवार की अन्य बेटियों शिवनंदनी और शिवदर्शनी को भी कथित तौर पर धमकियों और मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि संपत्ति के अधिकार को लेकर न्यायालय में चल रहे मामलों का फैसला आने तक किसी भी पक्ष को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।
मकान में किराएदार के रूप में रह रही पुष्पा को लेकर भी विवाद सामने आया। सुधा ने बताया कि मकान का किराएदारी संबंधी मामला न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय के निर्णय का सभी पक्षों को सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुष्पा और उसके परिवार को मकान खाली करने के लिए कथित रूप से धमकाया जा रहा है। आरोप है कि जुगमेंद्र ने पूर्व में भी घर पर अकेली पुष्पा को देखकर बदनीयती से उसके कपड़े फाड़े और विरोध करने पर जाति सूचक शब्दों से संबोधित की किया।

एक दिन पहले गुरुवार को हुक्मावती ने लगाए आरोप फिर शुक्रवार को पुष्पा का पलटवार

इस विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब गत दिवस हुक्मावती ने पत्रकार वार्ता के दौरान पुष्पा पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्वयं और अपनी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर खतरा जताया था। शुक्रवार को पुष्पा ने सामने आकर हुक्मावती द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया और पलटवार करते हुए कहा कि वास्तविकता कुछ और है। पुष्पा ने पत्रकारों के सामने कथित घटनाक्रम और संपत्ति विवाद से जुड़े अपने पक्ष को रखते हुए हुक्मावती और जुगमेंद्र पर गंभीर सवाल खड़े किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि न्यायालय में मामला विचाराधीन है और अंतिम फैसला अदालत को ही करना है।

हमें अदालत पर भरोसा, गुंडागर्दी पर रोक की मांग

प्रेस वार्ता में सुधा त्यागी और पुष्पा समेत शिवनंदनी व अन्य लोग मौजूद रहे। सुधा ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संपत्ति विवाद में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कथित धमकियों की जांच कर सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।
अब इस पारिवारिक विवाद में लगाए जा रहे गंभीर आरोपों की सच्चाई जांच और न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एक तरफ बुजुर्ग हुक्मावती अपनी जान-माल को खतरा बता रही हैं, तो दूसरी ओर सुधा और पुष्पा अपने अधिकारों तथा सुरक्षा की गुहार लगा रही हैं। वर्षों पुराने इस पारिवारिक और संपत्ति विवाद ने अब सार्वजनिक रूप ले लिया है।
पत्रकार वार्ता में इस दौरान शिवनंदनी, सुधा, पुष्पा, अजब सिंह, अमरीश त्यागी आदि मौजूद रहे।

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