उत्तर प्रदेश के नोएडा में सोमवार को हुई श्रमिक हिंसा ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इस पूरे घटनाक्रम को राज्य के विकास को पटरी से उतारने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। वेतन वृद्धि की आड़ में हुई इस आगजनी और पथराव के पीछे अब बाहरी ताकतों और आतंकी कनेक्शन का अंदेशा जताया जा रहा है।
पाकिस्तान कनेक्शन और आतंकी साजिश का शक
श्रम मंत्री अनिल राजभर ने सनसनीखेज बयान देते हुए कहा कि यह बवाल कोई सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं था। उन्होंने हाल ही में मेरठ और नोएडा से पकड़े गए 4 संदिग्ध आतंकियों का हवाला देते हुए कहा कि उन पकड़े गए संदिग्धों के तार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़े थे। मंत्री ने आशंका जताई है कि प्रदेश में अस्थिरता पैदा करने के लिए इस भीड़ का इस्तेमाल किया गया हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस अशांति का एक मकसद मुजफ्फरनगर में होने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में खलल डालना भी हो सकता था। जांच एजेंसियां अब इस आतंकी कनेक्शन के हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही हैं।
नोएडा के कई सेक्टरों में मचा तांडव
सोमवार को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर फैक्ट्री वर्कर सड़कों पर उतरे थे, लेकिन देखते ही देखते यह प्रदर्शन हिंसक हो गया। सेक्टर 60, 62, 84 और फेज-2 में उपद्रवियों ने जमकर उत्पात मचाया। उपद्रवियों ने सार्वजनिक संपत्ति को निशाना बनाया, कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया और पुलिस बल पर भारी पथराव किया। पत्थरबाजी के कारण नोएडा के प्रमुख मार्गों पर घंटों यातायात बाधित रहा, जिससे आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
‘संवाद से समाधान, हिंसा पर कड़ा एक्शन’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन और भारी पुलिस बल मौके पर तैनात है। श्रम मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार मजदूरों की हर जायज मांग सुनने के लिए तैयार है, लेकिन अराजकता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।उन्होंने श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी के बहकावे में न आएं। मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार श्रमेव जयते के मंत्र पर चलती है और श्रमिकों का कल्याण हमारी प्राथमिकता है। मजदूर भाई अपनी समस्याएं शांतिपूर्ण तरीके से रखें, उग्र प्रदर्शन किसी समस्या का हल नहीं है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
फिलहाल नोएडा के संवेदनशील इलाकों में पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की तैनाती कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी सीधे मजदूरों और कंपनी प्रबंधकों से बातचीत कर रहे हैं ताकि स्थिति को सामान्य बनाया जा सके और उनकी समस्याओं का न्यायसंगत निवारण हो सके।
