उत्तर प्रदेश के नोएडा में विभिन्न मांगों को लेकर श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है और संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा, ”मजदूरी में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने वृद्धि की है।… इस फैसले को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कल देर रात मंजूरी दे दी।

PunjabKesari

कुशल श्रमिकों और अकुशल श्रमिकों का बढ़ा बेतन 
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये प्रति माह के बजाय 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी। अन्य नगर निगम क्षेत्रों में संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किया गया है।

श्रमिकों ने मजदूरी बढ़ाने को लेकर कर रहे  थे प्रदर्शन 
शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रतिमाह, अर्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यह फैसला नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया। सरकार ने कहा कि ”संतुलित और व्यावहारिक” परिणाम के लिए सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया गया। यह कदम सोमवार को नोएडा में फैक्टरी श्रमिकों द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।

श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच समिति गठित 
सोमवार को हजारों श्रमिकों ने अधिक वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। जिले के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसके बाद सरकार ने स्थिति से निपटने तथा श्रमिकों और नियोक्ताओं के साथ बातचीत के लिए एक समिति गठित की थीा। बयान के अनुसार, समिति बातचीत और समन्वय के माध्यम से औद्योगिक असहमति को हल करने की दिशा में काम कर रही है तथा श्रमिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार कर रही है। इसमें कहा गया कि उद्योग बढ़ती लागत एवं निर्यात में गिरावट समेत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं,

वेतन बोर्ड की सिफारिशों पर मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया शुरू होगी
वहीं मजदूरी, अतिरिक्त समय काम करने पर भुगतान, सुरक्षा एवं कामकाजी परिस्थितियों को लेकर श्रमिकों की मांगें भी ”प्रासंगिक और महत्वपूर्ण” हैं। सरकार ने कहा, ”ऐसी स्थिति में उद्योग और श्रमिकों के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।” उसने कहा कि नयी श्रम संहिताओं के तहत प्रावधानों का उद्देश्य उचित मजदूरी सुनिश्चित करना और श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है। बयान में कहा गया कि सरकार जल्द गठित किए जाने वाले वेतन बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर अंतिम मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगी।

श्रमिकों के लिए 20,000 रुपये प्रतिमाह वेतन बढ़ाने की उड़ी थी अफवाह 
इस बीच, सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन खबरों को ”फर्जी और भ्रामक” करार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि श्रमिकों के लिए 20,000 रुपये प्रतिमाह की समान न्यूनतम मजदूरी तय कर दी गई है। सरकार ने कहा कि नयी श्रम संहिताओं के तहत राष्ट्रीय स्तर पर ”आधारभूत वेतन” तय करने की प्रक्रिया केंद्र के स्तर पर जारी है और इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियोक्ताओं से समय पर वेतन का भुगतान, अतिरिक्त समय काम कराने पर उचित पारिश्रमिक, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने खासकर महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षित कामकाजी माहौल बनाए रखने पर भी जोर दिया।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights