नई दिल्ली, 03 जुलाई । बिहार के मुंगेर में 700 साल पुराना बरगद के पेड़ की पुष्टि हुई है। रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक से पता चला कि इस पेड़ की आयु लगभग 700 वर्ष है।
यह अध्ययन लखनऊ के बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैलियोसाइंसेज की डॉ. त्रिणा बोस के नेतृत्व में डॉ. मयंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव की मदद से किया, जिन्होंने मिलकर पेड़ की उम्र का पता लगाने के लिए एक नया और अनोखा तरीका विकसित किया और उसे लागू किया। शोधकर्ताओं ने पेड़ के तने और प्राचीन शाखा से नमूने लेकर एक्सलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एएमएस) और रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक का उपयोग किया। इससे पेड़ की आयु का वैज्ञानिक रूप से सटीक निर्धारण संभव हुआ।
इस शोध में यह भी सामने आया कि यह बरगद ऐतिहासिक ‘बड़ा बंगला ’ से भी अधिक पुराना है। पहले माना जाता था कि पेड़ को भवन के निर्माण के समय लगाया गया था, लेकिन अब स्पष्ट हो गया है कि यह लगभग 700 वर्ष पुराना है और संभवतः उस प्राकृतिक वन का अवशेष है, जो कभी इस क्षेत्र में मौजूद था।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नई तकनीक देश और दुनिया के अन्य प्राचीन उष्णकटिबंधीय पेड़ों की आयु निर्धारित करने में भी उपयोगी होगी। इससे धरोहर वृक्षों के संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को नई दिशा मिलेगी।
यह शोध क्वार्टनरी रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
उल्लेखनीय है कि बरगद के पेड़, अपनी जटिल जड़ों और शाखाओं के जाल के साथ, पक्षियों और कीड़ों सहित कई तरह के वन्यजीवों को रहने की जगह देते हैं। सदियों से भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी इनकी अहम भूमिका रही है। पारंपरिक रूप से, इनकी उम्र का अंदाज़ा लोककथाओं, स्थानीय कहानियों या ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर लगाया जाता था, जो अक्सर सही नहीं होते थे। इसलिए पेड़ की उम्र का पता लगाने के लिए रेडियोकार्बन डेटिंग का सहारा लिया गया।
