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नई दिल्ली, 02 अप्रैल । विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत पश्चिम एशिया में होर्मुज जलसंधि क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन का समर्थन करता है। दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए स्वतंत्र नौवहन आवश्यक है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि हमारी जानकारी में है कि खाड़ी के देश बहरीन ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया है। उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव में होर्मुज जलसंधि क्षेत्र में नौवहन को सामान्य बनाने के लिए ईरान पर दबाव बनाने का आग्रह किया गया है।

प्रवक्ता ने कहा कि भारत, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ओर से बुलाई गई बैठक में भाग ले रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री इस बैठक में भाग ले रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा कि खाड़ी से भारतीय जलयानों को बिना बाधा के लाने के लिए ईरान सहित विभिन्न देशों से संपर्क बना हुआ है। इन टैंकरों के जरिए रसोई गैस एलपीजी, एलएनजी और अन्य उत्पादों की आपूर्ति होनी है। अब तक छह भारतीय जलयान होर्मुज क्षेत्र से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि कई पड़ोसी देशों ने पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति के लिए भारत से अनुरोध किया है। बांग्लादेश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत 2007 से ऊर्जा आपूर्ति करता रहा है। हाल में श्रीलंका को 38 हजार मीट्रिक टन पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति की गई है। नेपाल और भूटान के साथ भी अनुकूल व्यवस्था कायम है। प्रवक्ता ने कहा कि मालदीव ने पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति का अनुरोध किया है। इस पर घरेलू मांग और उपलब्धता को ध्यान में रखकर विचार किया जा रहा है।

खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर प्रवक्ता ने कहा कि इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं। सभी भारतीय सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावासों के संपर्क में हैं। दुर्भाग्य से संघर्ष के दौरान अब तक आठ भारतीयों की मृत्यु हुई है और एक लापता है।

By editor

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