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नई दिल्ली, 19 अप्रैल ।उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने आज गुरुग्राम में अहिंसा विश्व भारती द्वारा जैन आचार्य लोकेश मुनि के जन्मोत्सव पर आयोजित “विश्व शांति सद्भावना सम्मेलन” में भाग लिया। उन्होंने विश्व शांति और वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आचार्य लोकेश के 66वें जन्म दिवस के पावन अवसर पर “वी सपोर्ट पीस” अभियान का शुभारंभ किया गया। इस दौरान सीनियर सिटीजन केसरी क्लब की अध्यक्षा डॉ. किरण चोपड़ा तथा आचार्य पुंडरिक गोस्वामी भी मौजूद रहे।

इस अवसर पर उत्तराखंड राज्यपाल ने कहा कि अहिंसा, करुणा, समानता और भाईचारा मानवता के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक महान संत की जयंती नहीं, बल्कि उनके बताए गए मूल्यों को याद करने का अवसर भी है, जो दुनिया में शांति और एकता लाने में मदद करते हैं।

उत्तराखंड राज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया कई समस्याओं जैसे अस्थिरता, पर्यावरण संकट और सामाजिक असमानता का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों के अंदर बदलाव और अच्छे विचारों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सच्ची शांति अहिंसा, बातचीत और सहिष्णुता से आती है। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह के संदेश को आज भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों को समझने से आपसी मतभेद कम हो सकते हैं।

उत्तराखंड राज्यपाल ने कहा कि भारत हमेशा “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को मानता आया है और दुनिया को एकता और भाईचारे का संदेश देता रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित विकास है।

उन्होंने आचार्य लोकेश मुनि के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज में नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, नारी सम्मान और सामाजिक समरसता के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आचार्य लोकेश मुनि को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना की।

पंजाब के राज्यपाल गुलाब सिंह कटारिया ने कहा कि आचार्य लोकेश ने देश विदेश में भगवान महावीर की शिक्षाओं और प्राचीन भारतीय दर्शन के प्रचार के माध्यम से शांति और सद्भाव की स्थापना, समाज कल्याण के लिए निरंतर काम किया है। विश्व स्तरीय शांति केंद्र की स्थापना के साथ आचार्य का विश्व शांति और सद्भाव का दृष्टिकोण बहुत बड़े पैमाने पर जीवंत हो रहा है|

जैन आचार्य लोकेश ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि शांति केवल संघर्ष का अभाव नहीं है, बल्कि समझ, सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान का एक सजग अभ्यास है। उन्होंने विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और देशों के लोगों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में शांति के दूत बनें। उन्होंने यह भी कहा कि वे भारतीय सनातन संस्कृति और भगवान महावीर की शिक्षाओं में निहित अहिंसा, शांति और सद्भाव के संदेश को विश्वभर में फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की चेयरपर्सन डॉ किरण चोपड़ा ने कहा धर्म को समाज सेवा से जोड़कर अनेक भारतीय धर्माचार्य अद्भुत कार्य कर रहे है, उसमे आचार्य लोकेश जी अग्रिम पंक्ति में है।

आचार्य पुण्डरीक ने कहा कि धर्म का पालन करना एक जीवन-दर्शन है, जो व्यक्तिगत शांति के साथ-साथ वैश्विक सद्भावना और मानव एकता की ओर अग्रसर करता है। धीरज जैन को मानव सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

By editor

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