नीरज प्रजापति
गरीबी का दर्द समझा, हजारों के आंसू पोंछे, सोनू सूद ने हर्ष राठी को किया सम्मानित,एक साल की निस्वार्थ सेवा को दिल्ली में मिला सम्मान।
मुजफ्फरनगर। गरीबी का दर्द क्या होता है, यह वही इंसान बेहतर समझ सकता है जिसने जिंदगी में अभावों के दिन करीब से देखे हों। कभी खुद मुश्किल हालात से जूझकर आगे बढ़े एक युवा ने जब दूसरों के आंसू पोंछने का संकल्प लिया तो उसकी छोटी-सी पहल हजारों जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बन गई। सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले यूट्यूबर हर्ष राठी की इसी निस्वार्थ सेवा और मानवीय प्रयासों को बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने सराहा है। दिल्ली में आयोजित भारत लीडरशिप 2026 कार्यक्रम में सोनू सूद ने हर्ष राठी को सम्मानित कर उनके सेवा कार्यों का हौसला बढ़ाया। मंगलवार को पुरानी तहसील मार्केट स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में हर्ष राठी ने यह जानकारी साझा करते हुए अपने सेवा अभियान के पीछे छिपी भावनाओं और संघर्ष की कहानी बयां की। उन्होंने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व उन्होंने इंस्टाग्राम पर हेल्पिंग एजेंडा के नाम से एक पेज क्रिएट किया था जिसके माध्यम से निशुल्क सहायता का अभियान शुरू किया था। इस दौरान हजारों गरीब, असहाय और दिव्यांग लोगों की जरूरतों को समझते हुए उनकी मदद करने का प्रयास किया गया। जरूरतमंदों तक पहुंचकर उनकी परेशानियों को साझा किया और सहायता से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए।
हर्ष राठी ने बताया कि उनके इन प्रयासों और सेवा कार्यों की जानकारी बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद तक पहुंची। जरूरतमंदों के लिए किए जा रहे उनके कार्यों से प्रभावित होकर सोनू सूद ने उन्हें दिल्ली में आयोजित भारत लीडरशिप 2026 कार्यक्रम में सम्मानित किया। यह सम्मान उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों जरूरतमंद लोगों के संघर्ष और उम्मीदों का सम्मान है, जिनकी सहायता करने का उन्हें अवसर मिला। प्रेस वार्ता के दौरान हर्ष राठी भावुक नजर आए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निशुल्क सेवा शुरू करने के पीछे उनका उद्देश्य सोशल मीडिया पर खुद को दिखाना, लोकप्रियता हासिल करना या सेलिब्रिटी बनना कभी नहीं रहा। उनका कहना था कि उन्होंने गरीबी के दिन देखे हैं और अभावों के बीच जीवन जीने की पीड़ा को महसूस किया है। यही अनुभव उन्हें उन लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित करता है, जो आज भी दो वक्त की रोटी और बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि किसी दूसरे व्यक्ति को भी उन हालात से गुजरना पड़े, जिनसे निकलकर आज वह इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उनकी कोशिश है कि गरीबी की रेखा से नीचे जीवन गुजार रहे परिवारों को छोटी-छोटी मदद देकर उन्हें बेहतर जिंदगी की ओर आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए। हर्ष राठी का कहना है कि यह अभियान किसी एक दिन या सम्मान तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल से जारी इस मुहिम को आगे भी निरंतर जारी रखने का उनका संकल्प है। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद की आंखों में लौटी खुशी और किसी मजबूर परिवार के चेहरे पर आई मुस्कान ही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। दिल्ली में मिला सम्मान अब इस मानवीय मुहिम को नई ऊर्जा देने के साथ समाज के सामने एक संदेश भी छोड़ गया है कि दूसरों के दर्द को अपना समझने वाला एक इंसान भी हजारों जिंदगियों में बदलाव की वजह बन सकता है।
