नीरज प्रजापति

फिनलैंड की आर्किप्लग और भारतीय उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस ने मिलाया हाथ, एडवांस ड्राई तकनीक से बायो-सीएनजी उत्पादन को नई दिशा देने की तैयारी।

मुजफ्फरनगर। स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों के बीच जैविक कचरे को उपयोगी ऊर्जा में बदलने की दिशा में मुजफ्फरनगर से एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। बायो-सीएनजी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के विस्तार के उद्देश्य से आर्किप्लग उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की गई है। इस पहल के जरिए जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वच्छ ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देने और भारत में उन्नत जैव-ऊर्जा परियोजनाओं के विकास की संभावनाएं मजबूत करने पर जोर दिया गया है। बुधवार को भोपा रोड स्थित पलासा होटल एंड रिसॉर्ट में आर्किप्लग उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के पदाधिकारियों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान आर्किप्लग उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शुरुआत की गई नई कंपनी के बारे में विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की गई।

इस दौरान किरीट प्रजापति बताया कि यह पहल फिनलैंड की आर्किप्लग और भारत की उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य एडवांस ड्राई तकनीक के माध्यम से बायो-सीएनजी यानी कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन को प्रोत्साहित करना और देश में इस क्षेत्र की परियोजनाओं का विस्तार करना है। वहीं डॉ आलोक कुमार ने बताया कि ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के बीच जैविक कचरे से ईंधन तैयार करने वाली तकनीक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कृषि अवशेषों और अन्य उपयुक्त जैविक सामग्रियों का इस्तेमाल करके ऊर्जा उत्पादन की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। हालांकि, किसी भी परियोजना की सफलता स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता, तकनीकी क्षमता और आर्थिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी। नीरज कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी की ओर से एडवांस ड्राई तकनीक की विशेषताओं को प्रमुखता से सामने रखा गया। इस तकनीक का एक अहम पहलू पानी की खपत को कम करने की संभावना है। इसके साथ मल्टी फीड तकनीक के माध्यम से विभिन्न प्रकार की जैविक सामग्रियों को उपयोग में लाने पर जोर दिया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं को विकसित करना है, जिनमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उपयुक्त जैविक संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सके। इससे अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों और संसाधनों के अनुरूप बायो-सीएनजी परियोजनाओं की योजना बनाने का रास्ता खुल सकता है। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ जैविक कचरे के व्यवस्थित उपयोग की संभावनाएं भी इस पहल को महत्वपूर्ण बनाती हैं। उन्नत जैव-ऊर्जा तकनीक को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए उपयोगी बताया। वहीं डॉ. आलोक अग्रवाल ने बायो-सीएनजी क्षेत्र के विकास के लिए एडवांस्ड मल्टी फीड तकनीक की जरूरत पर जोर दिया। नीरज कुमार सिंह ने कंपनी की तकनीकी प्राथमिकताओं और एडवांस ड्राई तकनीक के जरिए परियोजनाओं के विस्तार की योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्किप्लग और उज्जाला बायो एनर्जी सॉल्यूशंस इस तकनीक पर कई वर्षों से काम कर रहे हैं। नई कंपनी के माध्यम से भारत में इसके उपयोग को व्यापक बनाने और अधिक परियोजनाओं को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। उज्जाला की मीडिया प्रमुख लवी अग्रवाल ने बायो-सीएनजी उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित करने और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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