जोनी शर्मा
मुजफ्फरनगर। सिविल लाइंस स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा के सुपुत्र पंडित अभिलाष शर्मा ने बताया कि इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर, दिन शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा, इस बार जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में ठीक वैसा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है जैसा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय बना था अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की उपस्थिति, जब भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ मध्यरात्रि में संयोग बनता है, तब जयंती योग का निर्माण होता है, यह विशेष और अति शुभकारी संयोग पूरे 15 साल बाद घटित हो रहा है, जो बिल्कुल वैसा ही है जैसा द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जन्म के समय था।जयंती योग में भगवान कृष्ण की पूजा और व्रत करने से जातक के तीन जन्मों के जाने-अनजाने में किए गए पापों का क्षय हो जाता है , इस दिन किए गए दान, जप और कीर्तन का फल आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक और अक्षय होता है एवं इस योग के दौरान किसी बालक का जन्म होता है, तो वह अत्यंत मेधावी, कला-प्रेमी और अपने कुल का नाम रोशन करने वाला होता है।
पंडित अभिलाष शर्मा ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को प्रातः 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 4 सितंबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी। वहीं इस दिन रोहिणी नक्षत्र रात 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा के लिए रात के समय अष्टमी तिथि का होना महत्वपूर्ण है। इस गणना के आधार पर इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस वर्ष जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। पूजा का शुभ समय रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाएगा और विधि-विधान से पूजा की जाएगी।
इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 30 मिनट से 5 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। ऐसे दुर्लभ और अति शुभकारी संयोग में भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण, संकीर्तन एवं भक्ति साधना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और श्रीकृष्ण कृपा का संचार करती है। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में जब शंखनाद के साथ “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” का जयघोष गूंजेगा, तब श्रद्धालु अपने आराध्य के जन्मोत्सव के साक्षी बनेंगे। इस पावन अवसर पर प्रेम, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सच्ची सार्थकता है।
