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नई दिल्ली, 22 अगस्त । ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिकार प्राप्त (सशक्त) समिति ने महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के विस्तार और उन्हें विकासोन्मुखी व्यवसायों में बदलने के लिए कई अहम प्रस्तावों की समीक्षा की।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के गैर-कृषि आजीविका (एनएफएल) घटक के तहत आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिला उद्यमियों को बढ़ावा देकर 6 करोड़ ‘लखपति दीदियां’ तैयार करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देना है।

बैठक में संयुक्त सचिव (ग्रामीण आजीविका) अमित शुक्ला और स्वाति शर्मा सहित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी तथा शैक्षणिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

समिति ने चार राज्यों में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी में नए इन्क्यूबेटर कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की है। इनमें आईआईटी पटना (बिहार), आईआईएम जम्मू (जम्मू-कश्मीर), आईआईएम लखनऊ (उत्तर प्रदेश) और आईआईटी गांधीनगर (गुजरात) शामिल है।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले ग्रामीण स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमों को व्यावसायिक रणनीति, मेंटरशिप, वित्तीय योजना, तकनीक और बाजार पहुंच में संरचित सहयोग दिया जाएगा। नए इन्क्यूबेटर मुख्य रूप से कई क्षेत्रों जैसे- खाद्य एवं कृषि-प्रसंस्करण, वस्त्र हस्तशिल्प और विनिर्माण, खुदरा सेवा एवं पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां और डिजिटल उद्यम पर केंद्रित होंगे।

स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी) में पश्चिम बंगाल और गोवा में गैर-कृषि उद्यमों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए इस कार्यक्रम के विस्तार को मंजूरी दी गई।

असम, बिहार पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के सफल मॉडल के बाद वर्तमान में 13 राज्यों में 14 इन्क्यूबेटर कार्यक्रम चल रहे हैं, जो 2,100 से अधिक एसएचजी उद्यमों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को केवल निर्वाह स्तर के काम से आगे बढ़ाकर उच्च कारोबार, मजबूत बाजार संपर्क और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने वाले टिकाऊ उद्यमों की दिशा में ले जाने के लिए तैयार की गई है।

By editor

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