एसआई सुभाष चंद की संवेदनशील पहल और जनसहयोग से मिली सफलता, एक भावुक अपील ने कराया मां-बेटी का मिलन
नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। सावन की पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान मां से बिछड़ी 16 वर्षीय किशोरी सुखमणि मेहता को लेकर प्रकाशित दैनिक मुद्गल टाइम्स की प्रमुख खबर का बड़ा असर देखने को मिला। दैनिक मुद्ग़ल टाइम्स में खबर प्रकाशित होने के बाद सूचना तेजी से शिवभक्तों, कांवड़ सेवा शिविरों और सोशल मीडिया के माध्यम से दूर-दूर तक पहुंची। आखिरकार अथक प्रयासों के बाद बिछड़ी बेटी को उसकी मां से सकुशल मिला दिया गया। मां-बेटी के मिलन का भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
इस पूरे अभियान में रामपुर तिराहा कांवड़ थाना प्रभारी एसआई सुभाष चंद की मानवीय संवेदनाओं से भरी कार्यशैली की हर ओर सराहना हो रही है। उन्होंने केवल पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी ही नहीं निभाई, बल्कि एक अभिभावक की तरह बेटी का हौसला बनाए रखा और लगातार कांवड़ मार्ग, शिविरों तथा पुलिस टीमों के संपर्क में रहकर खोज अभियान जारी रखा। उनकी भावुक अपील यदि कहीं शंकर जी और हनुमान जी की बड़ी प्रतिमाओं वाली कांवड़ दिखाई दे तो तुरंत सूचना दें, एक बेटी अपनी मां का इंतजार कर रही है ने हजारों शिवभक्तों को इस खोज अभियान से जोड़ दिया।
सूचना का व्यापक प्रसार होने के बाद शहर की हृदय स्थली शिव चौक पर सुखमणि की मां श्रीमती नीलम महता के होने की सूचना मिली। एसआई सुभाष चंद अपनी टीम के साथ सूचना पर तुरंत मौके पर पहुंचे और बेटी व मां दोनों को सुरक्षित मिलवा दिया। जैसे ही मां और बेटी आमने-सामने आए, दोनों एक-दूसरे से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। यह भावुक पल वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए अविस्मरणीय बन गया।
इस सफल प्रयास ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब संवेदनशील पुलिसिंग, जनसहयोग और जिम्मेदार पत्रकारिता एक साथ आती है, तो बिछड़े रिश्तों को भी फिर से मिलाया जा सकता है। दैनिक मुद्गल टाइम्स की खबर ने जहां इस मामले को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया, वहीं एसआई सुभाष चंद के नेतृत्व में पुलिस की तत्परता और मानवीय सोच ने एक परिवार की खुशियां लौटा दीं।
सावन की इस पावन यात्रा में यह घटना मानवता, सेवा और पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
