राबड़ी देवी की याचिका पर प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज ने 18 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राबड़ी देवी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि राबड़ी देवी जज को नीचा दिखाना करना चाहती हैं। सीबीआई के वकील डीपी सिंह ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने संबंधित जज को नीचा दिखाने के लिए ये याचिका दायर की है। राबड़ी देवी न्यायपालिका पर आरोप लगाती हैं, जबकि संबंधित जज विशाल गोगने प्रक्रियाओं का पूरा पालन कर रहे हैं। सीबीआई ने कहा था कि राबड़ी देवी अदालत को ध्वस्त करना चाहती हैं। वो ये तय नहीं कर सकतीं कि कौन सा जज केस सुने और कौन सा नहीं।
पहले की सुनवाई के दौरान राबड़ी देवी के वकील ने कहा था कि सुनवाई कर रहे विशाल गोगने प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं। वे 2026 में किसी भी तरह फैसला सुनाना चाहते हैं। उन्होंने जज विशाल गोगने पर आरोप लगाया था कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने आरोप तय करते समय याचिकाकर्ता को कोर्ट बुलाया था।
याचिका में राबड़ी देवी ने मामले की सुनवाई कर रहे जज विशाल गोगने से दूसरे जज के पास स्थानांतरित करने के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जज विशाल गोगने उनके प्रति पक्षपाती हैं और पूर्व-नियोजित तरीके से मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। राबड़ी देवी ने जज विशाल गोगने के पास लंबित चार मामलों को दूसरे जज के पास ट्रांसफर करने की मांग की थी।
राबड़ी देवी के खिलाफ विशाल गोगने के पास रेलवे टेंडर घोटाला और लैंड फॉर जॉब घोटाला के केस हैं। 13 अक्टूबर को जज विशाल गोगने ने रेलवे टेंडर घोटाला मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया है।
